चाहते है की हो आपकी हर मनोकामना पुरी तो यक्षिणी साधना से पहले बरतें ये सावधानियां, जरा सी भूल भी पड़ सकती है भारी !!

देवताओं की तरह यक्षिण या अप्सराएं भी मनुष्य की हर मनोकामना पूर्ण कर सकती है यक्षिणियों को प्रसन्न करने के लिए विभिन्न साधनाएं की जाती है।

देवताओं की तरह यक्षिण या अप्सराएं भी मनुष्य की हर मनोकामना पूर्ण कर सकती है यक्षिणियों को प्रसन्न करने के लिए विभिन्न साधनाएं की जाती है। जिनके संपन्न होते ही साधक की इच्छाएं पूर्ण होने लगती है फिर उसे धन वैभव और राज्य से सुख की प्राप्ति होती है। देवताओं की तरह यक्षिणी मतलब अप्सराएं भी मनुष्य की हर मनोकामना पूर्ण कर सकती है यक्ष चिड़ियों को प्रसन्न करने के लिए विभिन्न साथ जाएगी जाती है ।जिनके संपन्न होते ही सादा की इच्छा पूर्ण होने लगती है फिर उसे धन वैभव और राजसी सुख की प्राप्ति होती है।

यक्षिणी को भगवान शिव की दासियां भी कहा जाता है यक्श का शाब्दिक अर्थ होता है जादू की शक्ति। आदिकाल के प्रमुख रुप से यह रहस्यमई जातियां थी देव दैत्य दानव राक्षस यक्ष गंधर्व अप्सराएं पिशाच किन्नर वानर आदि यह सभी मानव से कुछ अलग है। इन सभी के पास रहती में ताकत होती थी और यह सभी मानव को किसी न किसी रूप में मदद करते थे ।देवताओं के बाद दिव्य शक्तियों के मामले में यक्ष का ही नंबर आता है। तो आज हम बात करते हैं कि ऐसी कौन सी सावधानियां बरतनी चाहिए यक्षिणियों की साधना में।

32 यक्षिणियों से संबंधित साधना अलग-अलग तरह से की जाती है लेकिन उन सभी को करने से पहले कुछ सावधानियां और तैयारियां अवश्य करनी पड़ती है जो निश्चित तौर पर साधना से भी ज्यादा कठिन है।

यक्षिणी साधना प्रारंभ करने से पहले चांद्रायण व्रत किया जाता है इस व्रत के अंतर्गत प्रतिप्रदा के दिन एक और भोजन दूज के दिन दोपहर भोजन और इसी प्रकार पूर्णिमा तक 11 पर हो जिनकी संख्या बढ़ाई जाती है ।और पूर्णिमा के पश्चात एक एकर घटाई जाती है इस वक्त से पिछले कई जन्मों के पाप नष्ट हो जाते हैं यह व्रत पूर्ण होने के बाद 16 रुद्राभिषेक किए जाते हैं और 51 हजार महामृत्युंजय मंत्र और 51 हजार कुबेर मंत्र का जाप कर शिवजी से यक्षिणी साधना की अनुमति ली जाती है।

अगर साधक पुण्यकर्म वाला है तो सपनों में स्वयं महादेव आगर यक्षिणी साधना की अनुमति देंगे नहीं तो कोई ना कोई संकेत दे कर आगे बढ़ने के लिए कहेंगे लेकिन अगर कोई बुरा सपना आया तो साधना नहीं की जानी चाहिए। यदि साधना कर ली गई तो फल प्राप्त नहीं होगा या फिर कोई बड़ा नुकसान होगा साधना की पूर्ण अवधि में ब्रह्मचर्य आदि का ध्यान रखना होता है ।अंत में पूर्णिमा की पूरी रात मंत्र जाप किया जाता है यह साधना भी तांत्रिक साधना की तरह ही होती है ।इसलिए जरा सी चूक भी नुकसान पहुंचाती है स्वभाव से आलसी और कायर व्यक्ति को इस साधना के विषय में सोचना भी नहीं चाहिए।

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