क्या आप जानते है यज्ञ के दौरान स्वाहा क्यों कहा जाता है…!!आज जानिए..!!!

क्या आप जानते है यज्ञ के दौरान स्वाहा क्यों कहा जाता है…!!आज जानिए..!!!

यज्ञ के दौरान स्वाहा क्यों कहा जाता है
यज्ञ के दौरान स्वाहा क्यों कहा जाता है

स्वाहा शब्द का अपने आप में बहुत महत्व है लेकिन हममें से ज्यादातर ये नहीं जानते हैं। स्वाहा का अर्थ ही अपने आप में बहुत रोचक है। यज्ञ के दौरान आपने अक्सर देखा होगा कि आहूति देते समय सभी ‘स्वाहा’ कहते हैं। मगर, क्या आपने कभी यह जानने की कोशिश की है कि इसका अर्थ क्या होता है और स्वाहा क्यों कहा जाता है।

अग्नि और स्वाहा से जुड़े पौराणिक कथा भी बेहद रोचक हैं। श्रीमद्भागवत तथा शिव पुराण में स्वाहा से संबंधित वर्णन आए हैं। इसके अलावा ऋग्वेद, यजुर्वेद आदि वैदिक ग्रंथों में अग्नि की महत्ता पर अनेक सूक्तों की रचनाएं हुई हैं।पौराणिक कथाओं के अनुसार, स्वाहा दक्ष प्रजापति की पुत्री थीं जिनका विवाह अग्निदेव के साथ किया गया था। अग्निदेव को हविष्यवाहक भी कहा जाता है। ये भी एक रोचक तथ्य है कि अग्निदेव अपनी पत्नी स्वाहा के माध्यम से ही हविष्य ग्रहण करते हैं तथा उनके माध्यम यही हविष्य आह्वान किए गए देवता को प्राप्त होता है।

एक और पौराणिक मान्यता के अनुसार अग्निदेव की पत्नी स्वाहा के पावक, पवमान और शुचि नामक तीन पुत्र हुए।इसके अलावा भी एक अन्य रोचक कहानी भी स्वाहा की उत्पत्ति से जुड़ी हुई है। कथा के अनुसार स्वाहा प्रकृति की एक कला थी जिसका विवाह देवताओं के अनुरोध पर अग्नि देव से हुआ था। भगवान श्रीकृष्ण ने स्वाहा को वरदान दिया था कि यज्ञ के समय उसका उच्चारण करने से ही देवता हविष्य को ग्रहण कर पाएंगे। देवताअों को भोग लगाने के पश्चात ही यज्ञ को पूर्ण माना जाता है। भोग में मीठा होना जरुरी होता है तभी देवता संतुष्ट होते हैं।

दरअसल, ऋग्वैदिक काल में इंसानों और देवताओं के बीच मध्यस्थ के रूप में अग्नि को चुना गया। उसके तेज में सब कुछ पवित्र हो जाता है। यज्ञ तभी पूरा माना जाता है आह्वान किए गए देवता को उनका पसंदीदा भोग पहुंचा दिया जाए। इसमें मीठा शामिल होना अनिवार्य है, तभी देवता संतुष्ट होते हैं। सभी वैदिक व पौराणिक विधान अग्नि को समर्पित मंत्रो एवं स्वाहा के द्वारा हविष्य सामग्री को देवताओं तक पहुंचने की पुष्टि करते हैं।यज्ञ के दौरान आहुति देते समय स्वाहा कहना जरुरी है माना जाता है कि देवताओं को समर्पित की गई वस्तु अग्नि में डालने पर वह उन तक पहुंच जाती है। मगर, ऐसा तभी संभव होगा, जब उसके साथ स्वाहा बोला जाता है।