अगर आपने सफेद मोती पहनने का सोचा है तो पहनने से पहले यह सावधानियाँ बरतना ना भूलें !!

ज्योतिष शास्त्र की वैज्ञानिकता पर विश्वास करने वाले इस विधा से संबंधित उपायों पर भी विश्वास करते हैं। भिन्न-भिन्न परेशानियों में काम आने वाले ये उपाय पूर्ण रूप से वैज्ञानिक ही होते हैं। भले ही लोग इन्हें अंधविश्वास का नाम दें परंतु वास्तव में यह कुछ और नहीं बल्कि विज्ञान का ही हिस्सा है। ज्योतिष शास्त्र में दिए जाने वाले उपाय अलग-अलग रूप के होते हैं। कुछ दान-पुण्य से जुड़े होते हैं तो कुछ मंत्र जाप संबंधित हैं। वहीं बेशकीमती रत्नों को धारण कर परेशानी का हल पाने के भी कई उपाय हैं।

रत्नों की बात करें तो आपने कई प्रकार के ज्योतिष रत्नों के बारे में सुना होगा। नीलम, पन्ना, रूबी, पुखराज… ये सभी बेहद महंगे ज्योतिष रत्न हैं लेकिन इनके उपरत्न भी उपलब्ध होते हैं जो इनके समान ही असर दिखाने में सक्षम होते हैं। इसके अलावा कुछ सस्ते रत्न जैसे कि हकीक, सुनैला, इत्यादि भी विभिन्न कारणों से उपयोग में लाए जाते हैं।

परंतु आज हम रत्नों से परे मोती की बात करेंगे। जी हां… रत्नों की तरह ही ग्रहीय विघ्नों को हल करने वाला यह मोती ज्योतिष शास्त्र के अनुसार एक महत्वपूर्ण ज्योतिष उपाय है। यह अमूमन सफेद रंग का होता है और इसे चंद्रमा का कारक माना गया है।

इसलिए पहनते हैं सफेद मोती

चंद्रमा की कमजोर स्थिति में, कुंडली में चंद्र ग्रहण लग जाने पर या फिर अन्य ज्योतिष कारणों से भी यह सफेद मोती धारण किया जाता है। परंतु यह मोती एक नहीं, कई प्रकार के होते हैं और इन्हें इस्तेमाल करने से कैसे-कैसे लाभ मिलते हैं आप जानेंगे तो इसे अवश्य धारण करने की सोचेंगे।

ऐसे करें शुद्ध मोती की पहचान

किंतु आप सही मोती यानि कि शुद्ध मोती पहन रहे हैं या नहीं, इसकी पहचान आप स्वयं कर सकते हैं। इसके लिए इन बातों का ध्यान रखें – जब आप मोती लेने जाएं तो उसे ध्यान से देखें कि कहीं से भी वह टूटा हुआ या खंडित तो नहीं है।

धारण करते वक्त बरतें ये सावधानियां

तो अगर आपको सही मोती मिल गया है और इसे धारण करना है तो इसके लिए भी कुछ सावधानियों को ध्यान में रखना जरूरी है। इन्हें नजरअंदाज करना नुकसानदेह होगा।

1.8 से 15 रत्ती का मोती चांदी की अंगूठी में जड़वा कर धारण करें। इस अंगूठी को सोमवार के दिन धारण करना है लेकिन धारण करने से ठीक एक रात पहले अंगूठी को दूध, गंगाजल, शहद, चीनी के मिश्रण में डालकर रात भर रखें। अगले दिन पांच अगरबत्ती चंद्रदेव को समर्पित करते हुए प्रज्जवलित करें और इस अंगूठी को अपनी कनिष्ठिका अंगुली में धारण कर लें।

2.ज्योतिष विशेषज्ञों के अनुसार चंद्रमा की यह अंगूठी धारण करने के 4 दिन के अंदर-अंदर अपना प्रभाव दिखाना शुरू कर देती है और औसतन 2 साल एक महीना और 27 दिन तक यह मोती अपना प्रभाव दिखाता है और इसके बाद निष्क्रिय हो जाता है।

3.यदि दोबारा इस मोती से लाभ पाना हो तो इस अंगूठी को गुनगुने पानी में चुटकी भर शुद्ध नमक डालकर रख दें। इससे इस अंगूठी की ऋणात्मक शक्ति नष्ट हो जाएगी और दोबारा उपयोग करने के लिए यह सक्षम हो जाएगी।=

4.अंत में हम आपको कुछ खास जानकारी देना चाहते हैं जिसमें हम आपको बताने जा रहे हैं कि किन-किन लोगों को चंद्रमा का यह मोती अवश्य धारण करना चाहिए। अमावस्या के दिन जन्मे लोग यह मोती अवश्य धारण करें। यदि कुंडली में राहु के साथ ग्रहण योग बन रहा है तो मोती जरूर पहनें।

5.यदि चंद्रमा कुंडली के छठे या आठवें भाव में बैठा है तो अशुभ प्रभाव कम करने के लिए मोती धारण करें। यदि चंद्रमा कुंडली में नीच का है तब भी मोती पहनना लाभकारी सिद्ध होता है।

 

 

 

 

 

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