भगवान विष्णु के तीन नाम, करदेंगे रोगों का नाश…!!!

भगवान विष्णु के तीन नाम, करदेंगे रोगों का नाश…!!!

प्रत्येक व्यक्ति कोई न कोई रोग से ग्रसित है, रोग या तो शारीरिक हो सकता है या मानसिक ।कभी-कभी सभी प्रकार की दवाएं कर लेने पर भी रोग मिटता नहीं, ऐसी स्थिति में भगवान का नाम-जप ही वह औषधि है जो मनुष्य के शारीरिक व मानसिक रोगों का नाश कर सकती है। हमारे शरीर में जो भी रोग होते हैं, उनका कारण हमारे पूर्वजन्म में या इस जन्म में किए हुए पापकर्म ही होते हैं। भगवान के नाम-जप से पाप नष्ट होने लगते हैं और इसी कारण पापजन्य रोग भी दूर होने लगते हैं।

भगवान धन्वन्तरि समुद्र-मंथन से प्रकट हुए। उन्होंने देवताओं व ऋषियों को औषधि, रोग-निदान और उपचार आदि के बारे में बताया। उन्होंने कहा–

अच्युतानन्तगोविन्द नामोच्चारण भेषजात्।

नश्यन्ति सकला रोगा: सत्यं सत्यं वदाम्यहम्।।

अर्थात्–‘अच्युत, अनन्त, गोविन्द–इन नामों के उच्चारणरूपी औषधि से समस्त रोग दूर हो जाते हैं, यह मैं सत्य-सत्य कहता हूँ।’

विष्णु के तीन नामों का यह श्लोक बहुत चमत्कारी है। इस श्लोक में भगवान के तीन नामों–‘अच्युत’, ‘अनन्त’ और ‘गोविन्द’ का उल्लेख किया गया है।

भगवान विष्णु के तीन नाम हैं अमोघ मन्त्र

‘अच्युत’, ‘अनन्त’ और ‘गोविन्द’ ये भगवान विष्णु के तीन नाम अमोघ मन्त्र हैं। इन नामों के शुरु में ‘ॐ’ (प्रणव) और अंत में ‘नम:’ लगा कर इनका जप करना चाहिए–

ॐ अच्युताय नम:

ॐ अनन्ताय, नम:

ॐ गोविन्दाय नम:

इस तीन नामरूपी मन्त्र का एकाग्रचित्त होकर जप करने से विष, रोग और अग्नि से होने वाली अकालमृत्यु का भय नहीं होता है। सभी प्रकार के रोगों से तथा शारीरिक व मानसिक कष्टों से मुक्ति मिल जाती है। इन नामों के जप करते रहने से कार्यों में सफलता मिलती है। भगवान विष्णु के इन नामों का जप उठते-बैठते, चलते-फिरते, सोते-जागते सब समय किया जा सकता है।

दृढ़ विश्वास, श्रद्धा, भगवान में सच्ची प्रीति तथा आस्तिक भावना धारण करने से भगवान अवश्य ही अपने भक्तों का कष्ट निवारण करते हैं। प्रभु पर सब कुछ छोड़ देने से मनुष्य निश्चिन्त हो जाता है और उसके सारे कष्टों का अंत हो जाता है। केवल विश्वास करने भर की देर है–

अनाथ कौन है यहां, त्रिलोकनाथ साथ हैं।

दयालु दीनबंधु के बड़े विशाल हाथ हैं।।

॥ जय श्री कृष्ण ॥