अद्भुत रहस्यमय हनुमान मंदिर जहां से हनुमान जी गए थे पाताल लोक प्रभु राम और भ्राता लक्ष्मण को अहिरावण से छुड़ाने..!!!

जैसा की आप पढ़ ही रहें है यह रहस्यमय मंदिर मध्य प्रदेश के उज्जैन शहर से 25 किलोमीटर दूर इंदौर रोड पर स्थित सांवेर नामक स्थान पर है उल्टे हनुमान मंदिर। इस मंदिर के बारे में जहाँ अनेक लोगों का मानना है उल्टे हनुमान मंदिर में स्थापित प्रतिमा हनुमान जी द्वारा उनके पाताल विजय की प्रतीक है। इसी प्रकार अनेक लोगों का यह भी मानना है कि सांवेर ही वह स्थान था, जहां से हनुमान जी पाताल लोक की और गए थे, वहीँ इस मंदिर के

उलटे हनुमान की मूर्ति
उलटे हनुमान की मूर्ति

बारे में ये भी कहा जाता है में बजरंगबली की उल्टी प्रतिमा स्थापित है। यह प्रतिमा संभवतया हनुमान जी की विश्व में इकलौती उल्टी प्रतिमा है।

हिन्दू धर्मग्रंथों में बल और बुद्धि के देवता माने जाने वाले हनुमान जी की खड़ी और बैठी हुई मूर्ति प्राय: सभी मंदिरों में मिलती है, लेकिन सिर के बल खड़े

हनुमान जी प्रतिमा न केवल दुर्लभ बल्कि अप्राप्य ही है।

रामायण के एक प्रसंग अनुसार, जब भगवान श्रीराम और रावण का युद्ध हो रहा था। तब रावण के मित्र पातालराज अहिरावण ने एक चाल चली। उसने वेश बदल कर स्वयं को राम की सेना में शामिल कर लिया। एक रात्रि जब समय सभी लोग सो रहे थे, तब अहिरावण ने अपनी मायावी शक्ति से श्रीराम

उलटे हनुमान की मूर्ति
उलटे हनुमान की मूर्ति

और लक्ष्मण को मूर्छित कर उनका अपहरण कर लिया।

एक कबूतर से हनुमान जी को पता चलता है कि भगवान राम और लक्ष्मण जी को अहिरावण पाताल ले गया है, जहां उनकी बलि देने की तैयारी चल रही है। तब हनुमान जी उन दोनों की खोज में पाताल लोक पहुंच जाते हैं और भगवान राम और लक्ष्मण सहित अहिरावण से युद्ध कर उसका नाश कर देते हैं।

इस प्रकार श्री राम और लक्ष्मण के प्राणों की रक्षा करते हैं और उन्हें पाताल से निकाल कर सुरक्षित बाहर ले आते हैं।

जब हनुमान जी पाताल लोक जा रहे थे, तब उस समय हनुमान जी के पांव आकाश की ओर और सिर धरती की ओर था। यही कारण है कि यहां उनके इस उल्टे रूप की पूजा की जाती है।

 

Loading...