पढ़िए क्यू है ज़रूरी महाकाल बाबा के दर्शन इस शिवरात्रि पर….?? क्या है खास उज्जैन की शिवरात्रि..!!!?

महाशिवरात्रि पर्व शिव और शक्ति के मिलन का प्रतीक। सृष्टि के आदि देव श्री महादेव और मां शक्ति के अद्भुत मिलन से इस सृष्टि का विकास हुआ। ऐसे परम सौभाग्यशाली अवसर पर श्रद्धालु पूजन – अर्चन कर पुण्यलाभ कमाते हैं भगवान शिव की इस खास दिन पर अर्चना कर श्रद्धालुओं के के सारे पाप मिट जाते हैं। यही नहीं भगवान शिव को भजने से स्वतः जीवन में शक्ति का जागरण होता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार भगवान शिव इस मृत्युलोक के स्वामी हैं।

साक्षात् महाकाल के स्वरूप में उन्होंने काल को साध रखा है और काल ही उनके अधीन है। शिव के इस स्वरूप में पूजन करने से अकाल मृत्यु को टाला जा सकता है। यही नहीं भगवान शिव जीवन में कई तरह के संदेश भी देते हैं। भगवान शिव के पूजन का ऐसा ही अवसर इस वर्ष फिर आ रहा है।इस हेतु मंदिर, गलियां, शहर सजकर तैयार हो गए हैं। दरअसल शिवरात्रि के अवसर पर घर – घर में शिव का पूजन होगा।

तो दूसरी ओर मंदिरों में शिवलिंग पर जल, दूध, दही, शहद, शकर, घी से अभिषेक किया जाएगा। यही नहीं भगवान को जल भी समर्पित किया जाएगा। शिव पर लगातार श्रद्धालुओं की श्रद्धा जल और अन्य पंचतत्वों की बूंदे बनकर बरसती रहेंगी भगवान सांबसदा शिव अपने श्रद्धालुओं के पापों को समाप्त कर उन्हें आशीर्वाद प्रदान करेंगे। शिवरात्रि के दिन पूजन का बड़ा ही महत्व है। शिवरात्रि का पूजन करने के लिए श्रद्धालु यदि अलसुबह उठ जाऐं तो यह और भी बेहतर होता है।

सुबह उठने के ही साथ स्नान आदि से निवृत्त होकर श्रद्धालु भगवान शिव का मनन करे। इस दिन व्रत करे। व्रत में फलाहारी आदि का सेवन करे और भगवान शिव के मंदिर में शिव लिंग पर जल, दूध, दही, शहद, शकर, घी या इनमें से कोई भी तत्व अपनी इच्छा और शक्ति के अनुसार चढ़ाए । दूसरी ओर शिव पर बिल्वपत्र, धतूरा या अघाड़े के पुष्पों को चढ़ाए तो उसकी सभी मनोकामनाऐं पूर्ण होती हैं। भगवान सांबसदाशिव का पूजन व्यर्थ नहीं जाता है। इस दिन की गई शिवार्चना से श्रद्धालुओं को शिवलोक की प्राप्ति होती है। भगवान शिव अपने भक्तों को समृद्ध करते हैं। भगवान शिव की आराधना इस दिन करने से शक्ति अर्थात् माता पार्वती की आराधना स्वतः ही हो जाती है। यदि श्रद्धालु इस दिन द्वादश

ज्योर्तिलिंग का पूजन, दर्शन या फिर मनन कर सकें तो यह और भी पुण्यदायी होगा। शिवरात्रि को लेकर अन्य महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि शिवरात्रि के पहले नौ दिनों तक मध्यप्रदेश के उज्जैन में प्रतिष्ठापित ज्योर्तिलिंग श्री महाकालेश्वर में शिवनवरात्रि मनाई जाती है। ज्योर्तिलिंग का आकर्षक श्रृंगार किया जाता है यही नहीं भगवान को शिवरात्रि वाले दिन आकर्षक अंदाज़ मे सजाया जाता है।

शिवरात्रि के पूर्व श्री महाकालेश्वर को हल्दी भी लगाई जाती है। शिवरात्रि के अगले दिन अर्थात् दूसरे दिन तड़के होने वाली भस्मारती नहीं हो पाती है। यह भस्मारती दोपहर 12 बजे होती है। वर्ष में केवल एक बार ही ऐसा अवसर होता है जब भस्मारती दिन में होती है। इस दिन सुबह श्री महाकालेश्वर के सेहरे के पुष्प श्रद्धालुओं द्वारा बड़ी ही श्रद्धा से प्राप्त किए जाते हैं। बाबा श्री महाकालेश्वर के आकर्षक दर्शन पाकर श्रद्धालु अभिभूत हो उठते हैं।