इस मँदिर मे अपने परम भक्त पर प्रसन्न होकर खुद खिड़की तक चली गई थी यहां की कृष्ण मूर्ति !!

यहां भक्त के लिए अपनेआप बदल गई थी कृष्ण मूर्ति की दिशा !!

दक्षिण भारत में भगवान कृष्ण के कई अनोखे और सुंदर मंदिर है, जिनमें से एक है उडुपी का कृष्ण मंदिर। उडुपी कर्नाटक का एक गांव है। इस मंदिर की सबसे खास बात यह है कि इस मंदिर में अपने भक्त को दर्शन देने के लिए भगवान कृष्ण खुद ही मंदिर की खिड़की तक चले गए थे।

ऐसे हुआ था मंदिर का निर्माण

इस मंदिर के निर्माण के पीछे एक कथा प्रसिद्ध है। कथा के अनुसार, एक बार यहां भयंकर समुद्री तूफान आया। उसी दौरान संत माधवाचार्य समुद्र के किनारे खड़े थे। उन्होंने देखा कि एक जहाज समुद्र के बीच में फंस गया है। यह देखकर वे अपनी शक्तियों से जहाज को सुरक्षित किनारे तक ले आए। जहाज पर सवार लोगों ने संत को धन्यवाद कहते हुए, भेंट के रूप में भगवान कृष्ण और बलराम की दो मूर्तियों दी। संत ने भगवान कृष्ण की मूर्ति को उडुपी में और भगवान बलराम की मूर्ति को यहां से 5 कि.मी. दूर मालपी नाम की जगह पर स्थापित कर दिया। मालपी के बलराम मंदिर को वदंबेदेश्वरा मंदिर और उडुपी के कृष्ण मंदिर को कृष्ण मठ कहा जाता है।
यहां भक्त के लिए अपनेआप बदल गई थी कृष्ण मूर्ति की दिशा
यहां भक्त के लिए अपनेआप बदल गई थी कृष्ण मूर्ति की दिशा

भक्त पर प्रसन्न होकर खुद खिड़की तक चली गई यहां की मूर्ति

कहा जाता है कि एक बार यहां पर भगवान कृष्ण के दर्शन करने के लिए कनकदास नाम का एक भक्त आया। ब्राह्मण न होने की वजह से उसे मंदिर में प्रवेश करने की आज्ञा नहीं दी गई। उदास होकर कनकदास मंदिर की खिड़की के पास जा खड़ा हुआ ।और वहीं से भगवान के दर्शन करने की कोशिश करने लगा। उसकी भक्ति देखकर भगवान कृष्ण की मूर्ति खुद ही चलकर मंदिर की खिड़की के पास आ गई और कनकदास को दर्शन दिए।

खिड़की को कहा जाता है कनकाना किंदी

उस दिन से लेकर आज तक भगवान कृष्ण की मूर्ति मंदिर में पीछे की ओर देखते हुई ही स्थापित है। जिस खिड़की के पास यह मूर्ति स्थापित है, उसे कनकाना किंदी के नाम से जाना जाता है। कनकाना किंदी खिड़की को मीनाकारी से सजाया गया है। इस खिड़की में 9 छोटे-छोटे छेद हैं, जिनमें से अंदर झांकने पर भगवान कृष्ण के दर्शन होते हैं।
कनकाना किंदी
कनकाना किंदी

ऐसी है यहां की मूर्ति

यहां पर भगवान कृष्ण की युवावस्था की एक सुंदर मूर्ति है, जिसमें वे अपने दाएं हाथ में एक मथानी और बाएं हाथ में रस्सी पकड़े हुए हैं। यहां की कृष्ण मूर्ति का स्वरूप बहुत ही सुदंर और मनमोहक है।