जानिए भारत के 5 सबसे ज़्यादा आमिर मंदिरो के नाम…!!!!

1. पदमनाभ स्वामी मंदिर, त्रिवेंद्र :
पदमनाभ स्वामी मंदिर भारत का सबसे अमीर मंदिर है। यह  त्रिवेंद्रम शहर के बीच स्थित है। इस मंदिर की देखभाल त्रावणकोर के पूर्व शाही परिवार द्वारा की जाती है। यह मंदिर बहुत प्राचीन है और द्रवि़ड शैली में बनाया गया है। मंदिर की कुल एक लाख करो़ड की संपत्ति है।

2. तिरूपति बालाजी का मंदिर, आंध्रप्रदेश :
तिरूपति बालाजी का मंदिर आंध्रप्रदेश के चित्तूर जिले में स्थित है। यह मंदिर वास्तुकला का अjुत नमूना है। मंदिर सात पह़ाडों से मिलकर बने तिरूमाला के पह़ाडों पर स्थित है। इस तिरूपति मंदिर में भगवान वेंकटश्वर निवास करते है। भगवान वेंकटश्वर को विष्णुजी का अवतार माना जाता है। यह मंदिर समुद्र तल से 2800 फिट की ऊंचाई पर स्थित है। इस मंदिर को तमिल राजा थोडईमाननें ने बनवाया था। इस मंदिर में लगभग 50,000 श्रृद्धालु रोज दर्शन करने आते हैं। मंदिर की कुलसंपत्ति लगभग 50,000 करो़ड है।

3. श्री जगन्नाथ मंदिर, पुरी :
पुरी का श्री जगन्नाथ मंदिर एक हिन्दू मंदिर है, जो भगवान जगन्नाथ  को समर्पित है। यह भारत के उ़डीसा राज्य के तटवर्ती शहर पुरी में स्थित है। जगन्नाथ शब्द का अर्थ जगत के स्वामी होता है। इनकी नगरी ही जगन्नाथपुरी या पुरी कहलाती है। इस मंदिर को हिन्दुओं के चार धाम में से एक गिना जाता है। यह वैष्णव सम्प्रदाय का मंदिर है। पुरी जगन्नाथ मंदिर भारत के दस अमीर मंदिरों में से एक है। इस मंदिर के लिए जो भी दान आता है। वह मंदिर की व्यवस्था और सामाजिक कामों में खर्च किया जाता है।

4. सांई बाबा मंदिर, शिरडी :
सांई बाबा एक भारतीय गुरू, योगी और फकीर थे, उन्हें उनके भक्तों द्वारा संत कहा जाता है। उनके असली नाम, जन्म, पता और माता पिता के सन्दर्भ में कोई सूचना उपलब्ध नहीं है। सांई शब्द उन्हें भारत के पश्चिमी भाग में स्थित प्रांत महाराष्ट्र के शिरडी नामक कस्बे में पहुंचने के बाद मिला। शिरडी सांई बाबा मंदिर भी यहीं बना हुआ है। सांई बाबा मंदिर भारत के अमीर मंदिरों में से एक माना जाता है। इस मंदिर की संपत्ति और आय दोनों ही करो़डों में है। मंदिर के पास लगभग 32 करो़ड की चांदी के जेवर हैं। 6 लाख कीमत के चांदी के सिक्के हैं। साथ ही, हर साल लगभग 350 करो़ड का दान आता है।

5. सिद्घिविनायक मंदिर, मुंबई :
सिद्घिविनायक गणेश जी का सबसे लोकप्रिय रूप है। गणेश जी की जिन प्रतिमाओं की सू़ड दाईं तरह मु़डी होती है, वे सिद्घपीठ से जु़डी होती हैं और उनके मंदिर सिद्घिविनायक मंदिर कहलाते हैं। सिद्धि विनायक की महिमा अपरंपार है, वे भक्तों की मनोकामना को तुरंत पूरा करते हैं। मान्यता है कि ऎसे गणपति बहुत ही जल्दी प्रसन्न होते हैं और उतनी ही जल्दी कुपित भी होते हैं। सिद्धी विनायक मंदिर भारत के रईस मंदिरों में से एक माना जाता है। इस मंदिर को 3.7 किलोग्राम सोने से कोट किया गया है, जो कि कोलकत्ता के एक व्यापारी ने दान किया था।