जानिये ऐसे शिवलिंग कें बारे में जो ऊपर से टूटा और भीतर से खोखला है!!!

ऐसे शिवलिंग कें बारे में जो ऊपर से टूटा और भीतर से खोखला है!!!

कनकी हसदेव नदी के तट पर बसा एक छोटा सा गाँव है, जहाँ स्थित कनकेश्वर महादेव मंदिर धार्मिक और ऐतिहासिक दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण मंदिर है।इस मंदिर को चक्रेश्वर महादेव मंदिर भी कहा जाता है। कनकेश्वर मंदिर की खासियत यहां स्थित शिवलिंग है जो ऊपर से टूटा हुआ और भीतर से खोखला है।

कनकेश्वर महादेव
कनकेश्वर महादेव

यह मंदिर पत्थरों को काट कर बनाया गया है और इसमें विभिन्न देवी देवताओं की प्राचीन प्रतिमाएं रखी गई हैं जो गांव में स्थित तालाब की खुदाई के दौरान मिली थीं।यह मंदिर कनकी रायपुर से 197 कि.मी. दूर कोरबा जिले में स्थित है। माना जाता है कि एक गाय प्रतिदिन इस शिवलिंग पर अपना दूध अर्पित करती थी। जब एक दिन ग्वाले ने ये सब देखा तो उसने क्रोध में आकर वहां डंडे से प्रहार किया जहां प्रतिदिन दूध गिरता था। जैसे ही उसने डंडा मारा वहां कुछ टूटने की आवाज आई और कनकी अर्थात चावल के दाने वहां बिखर गए। जब उस स्थान की सफाई की गई तो वहां टूटा हुआ शिवलिंग प्राप्त हुआ। उसके पश्चात वहां मंदिर का निर्माण करवाया गया।

कहा जाता है कि शिवलिंग के पास कनकी के दाने पड़े होने के कारण मंदिर का नाम कनकेश्वर महादेव रखा गया। मंदिर के निर्माण के पश्चात वहां गांव भी बस गया, जिसका नाम कनकी रखा गया। प्रत्येक वर्ष यहां सावन में बहुत से भक्त भोलेनाथ के दर्शनों हेतु आते हैं।