जाने क्या है बाबा महाकाल की तीसरी आँख का रहस्य…!!!!!!

शीव जी के मस्तक पर जो तीसरा नेत्र हमे नजर आता है, उसे शास्त्रो मे ज्ञान का प्रतीक गया है. बहुत सी तस्वीरो और चित्रो मे वह एक बड़े तिलक की तरह भी नज़र आती है. कहते हैं कि उनके क्रोधि‍त होने पर ही यह खुलता है और सब कुछ भस्म कर देता है. वैसे इसकी ताक़त को बुराइयों और अज्ञानता को खत्म करने का सूचक भी माना जाता है.

असल में भगवान शिव की तीसरी आँख उनका कोई अलग सा अंग नहीं है यह प्रतीक है उस दृष्टि का जो आत्मज्ञान के लिए आवश्यक है. भगवान शिव जैसे महान योगी के पास तीसरी आँखे होना कोई अचरज की बात नहीं है.

व्यक्ति को संसार को देखने के लिए सिर्फ दो आँखे ही पर्याप्त है परन्तु संसार एवं संसारिक से परे देखने के लिए आवश्यक है तीसरी आँख का होना जो केवल भगवान शिव जैसे योगी के पास ही हो सकती है.

अर्थात तीसरी आँख बाहर नहीं भीतर देखने के लिए होती है. अर्थ तीसरी आँख प्रतीक है बुद्धिमता, ज्ञान एवं विवेकशीलता का.