प्रहलाद ने करवाया था भगवान नरसिंह के इस मंदिर का निर्माण, साल में एक ही बार होते है दर्शन!

भक्त प्रह्लाद की रक्षा के लिए भगवान विष्णु ने नरसिंह का अवतार लिया था

जब-जब धर्म के ऊपर अधर्म भारी पड़ा है, तब-तब विष्णु भगवान ने धरती पर भिन्न-भिन्न रूप में अवतार लेकर अधर्म का विनाश किया है। सतयुग में अपने भक्त प्रह्लाद की रक्षा के लिए विष्णु भगवान ने नरसिंह का अवतार लिया। तब से ही भगवान विष्णु के नरसिंह अवतार को धरती पर पूजा जाने लगा।

आज भी कई स्थानों पर भगवान नरसिंह के मंदिर स्थापित है। सिंहाचलम इन्हीं मंदिरों में से एक है जो विशाखापट्टनम से करीब 16 किलोमीटर की दूरी पर स्थित सिंहाचल पर्वत पर स्थापित है। सिंहाचलम मंदिर को नरसिंह भगवान का घर भी कहा जाता है। इस मंदिर की सबसे बड़ी खासियत ये है कि इस मंदिर में नरसिंह भगवान मां लक्ष्मी के साथ विराजमान हैं तथा यहां उनकी प्रतिमा पर चंदन का लेप लगाया जाता है।

●साल में एक ही बार हटाया जाता है चंदन का लेप

साल में केवल एक ही बार अक्षय तृतीया के दिन इस चंदन के लेप को हटाया जाता है। केवल उसी दिन लेप हटाने के कारण भक्तों को नरसिंह भगवान की प्रतिमा के दर्शन हो पाते हैं। ऐसी मान्यता है कि इस मंदिर का निर्माण भक्त प्रह्लाद ने करवाया था।

●भक्त प्रह्लाद ने कराया था इस मंदिर का निर्माण

मान्यता के मुताबिक, जब हिरण्यकश्यप का वध भगवान नरसिंह ने किया था, उसके बाद ही भक्त प्रह्लाद ने इस मंदिर का निर्माण करवाया था।ऐसी बताया जाता है कि समय के साथ वह मंदिर धरती की कोख में समा गया, जिसका पुन:र्निमाण पुरूरवा नामक राजा ने करवाया था। ऐसा कहा जाता है कि राजा पुरूरवा ने ही धरती में समाहित हुए भगवान नरसिंह की प्रतिमा को बाहर निकालकर उसे फिर से स्थापित कर चंदन के लेप से ढंक दिया।

अक्षय तृतीया के दिन हटाया जाता है लेप:

अक्षय तृतीया पर चंदन के इस लेप को प्रतिमा से हटाया जाता है। इसी दिन यहां उत्सव भी किया जाता है। प्रातः चार बजे से मंदिर में मंगल आरती के साथ दर्शन की प्रक्रिया शुरू हो जाती है। इस मंदिर में लगभग साल भर भक्तों का आना-जाना चला रहता है।

● चंदन के लेप से क्यो ढंकी रहती है मूर्ति

पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक, हिरण्यकश्यप के वध के वक्त भगवान नरसिंह बहुत क्रोध में थे। हिरण्यकश्यप के वध के बाद भी उनका क्रोध शांत नहीं हुआ था , इस वजह से उनका पूरा शरीर गुस्से से जलने लगा। तब उन्हें ठंडक पहुंचाने के लिए चंदन का लेप लगा दिया था। जिससे उनके गुस्से में कमी आई थी। तब ही से नरसिंह भगवान की प्रतिमा को चंदन के लेप में ही रखा जाने लगा। केवल एक दिन के लिए ही अक्षय तृतीया पर यह लेप हटाया जाता है।

●इस मंदिर तक इस तरह पहुंचे:

नरसिंह भगवान का यह मंदिर विशाखापट्टनम शहर से करीब 16 किमी दूरी पर स्थित है। विशाखापट्टनम तक रेल, बस तथा हवाई मार्ग की सुविधा है। विशाखापट्टनम से मंदिर तक बस से या फिर निजी वाहन से जाया जा सकता है।

●दर्शन करने का समय

सुबह चार बजे से मंदिर में मंगल आरती के साथ दर्शन आरम्भ हो जाते हैं। सुबह 11.30 बजे से 12 बजे तक तथा दोपहर 2.30 बजे से 3 बजे तक, दो बार आधे-आधे घंटे के लिए दर्शन बंद होते हैं। रात्रि को 9 बजे भगवान के शयन का समय होता है।