श्री कृष्ण इन चीजों से होते हैं प्रसन्न..!!आप भी पढ़िए और खुश करिये कान्हा को..!!!

श्री कृष्ण इन चीजों से होते हैं प्रसन्न..!!आप भी पढ़िए और खुश करिये कान्हा को..!!!

भगवान श्रीकृष्ण को उनकी प्रिय चीजों को अर्पित करके उन्हें शीघ्र ही प्रसन्न किया जा सकता है लेकिन क्या आप जानते है उनकी वो प्रिय चीजें आखिर कौन सी है।आइए आज हम आपको बताते हैं श्रीकृष्ण की प्रिय चीजें, जिन्हें पाकर वे बेहद प्रसन्न होते हैं। तो आइये पढ़ते है:

1 – बांसुरी

भगवान श्रीकृष्ण को बांसुरी बेहद पसंद है उन्हें बांसुरी से इतना लगाव था कि वो इसे हमेशा अपने साथ रखते थे।बांसुरी से लगाव होने के पीछे भी उसके

खास गुण बताए जाते हैं जैसे जिस तरह से बांसुरी में कोई गांठ नहीं होती है ठीक उसी तरह से मनुष्य को भी किसी बात की गांठ नहीं बांधनी चाहिए।

2 – गाय

भगवान श्रीकृष्ण को गाय माता बहुत पसंद हैं,क्योंकि गौ माता सभी कामों में उदार और सभी गुणों की खान मानी जाती है।कहा जाता है कि गौ माता से मिलनेवाला गौ का मूत्र, गोबर, दूध, दही और घी पान कर लेने से शरीर के भीतर पाप नहीं ठहरता है।जो गौ की एक बार प्रदक्षिणा करके उसे प्रणाम करता है वह सब पापों से मुक्त होकर अक्षय स्वर्ग का सुख भोगता है।

3 – मोरपंख

मोर के पंख श्रीकृष्ण को इतने पसंद थे कि वे उसे अपने सारा पर सजे हुए मुकुट में स्थान देते थे।मोर के पंख के बारे में कहा जाता है कि श्रीकृष्ण को बेहद पसंद है, इसलिए वो हमेशा मोरपंख को अपने सिर के मुकुट में धारण करते हैं।

4 – कमल से बनी वैजयंती माला

कमल में कभी भी कोई अवगुण नहीं आता है।इसलिए श्रीकृष्ण सदैव अपने गले में कमल से बनी वैजयंती माला को धारण करते हैं।यह वैजयंती माला

जितनी चमकदार होती है इसके बीज उतने ही सख्त होते हैं इसलिए ये टूटते नहीं हैं जिससे यह सीख मिलती है कि किसी भी अवस्था में टूटे नहीं और हमेशा चमकदार बने रहें।

5 – माखन-मिश्री

कान्हा को माखन-मिश्री प्रिय है और उसे खाने के लिए वो घर-घर से माखन चुराते थे इसलिए उन्हें माखन चोर भी कहा जाता है।मिश्री का सबसे बड़ा गुण यह है कि जब भी इसे माखन में मिलाया जाता है तो उसकी मिठास माखन में पूरी तरह से घुल जाती है।यह हमे सीख देती है कि हमें अपने भी अपने

व्यवहार और वाणी रुपी माखन में मिश्री जैसी मिठास घोलनी चाहिए।

जो भी श्रीकृष्ण के समक्ष श्रीकृष्ण की प्रिय चीजें भेंट करता है उन्हें श्रीकृष्ण की कृपा प्राप्त होती है।

॥ जय श्री कृष्ण ॥

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