एक श्राप के कारण रोज घट रहा हे श्री कृष्ण का ये पर्वत…..

क्यों घट रहा हे श्री कृष्णा का ये पर्वत ? क्या हे इसके पीछे की कहानी ?

गोवेर्धन पर्वत का पास से लिया गया चित्र

भगवान श्री कृष्णा का एक ऐसा पर्वत हे जो रोज एक मुट्ठी बराबर घटता हे | यह पर्वत उत्तर-प्रदेश के जिला मथुरा के अंतर्गत आता हे |यह पर्वत गोवेर्धन पर्वत के नाम से जाना जाता हे | गोवेर्धन पर्वत की एक रोचक कहानी हे | यह पर्वत किसी श्राप के चलते रोज एक मुट्ठी बराबर घटता हे|गोवेर्धन पर्वत के आस-पास के क्षेत्र को ब्रज भूमि भी कहा जाता हे | गोवेर्धा पर्वत को गिरिराज भी कहा जाता हे|

*आखिर क्यों दिया था गोवेर्धन पर्वत को श्राप –

ऐसा कहा जाता हे की ऋषि,पुल्तस्य गिरिराज की सुन्दरता को देखकर बेहद प्रसन्न हो गये थे| जिसके चलते उन्होंने गिरिराज जी को द्रोनाचल पर्वत से उठाया और अपने अपने साथ ले चले | लेकिन उठाने से पहले गिरिराज जी ने कहा था की मझे जहा भी सबसे पहले रखा जायेगा में वही स्थापित हो जाऊंगा | ऋषि मुनि ने अपनी साधना करने के लिए गिरिराज जी को निचे रख दिया और उनकी साधना पूरी होने के बाद जब ऋषि मुनि की लाख कोशीश के बाद भी जब गिरिराज जी अपनी जगह से नही हिले तब क्रोधित होकर ऋषि पुल्तस्य ने गिरिराज जी को श्राप दिया की वो हर दिन एक मुट्ठी के बराबर घटेगा|उसी समय से गिरिराज जी वही हे और रोज कम होते जा रहे हे| पोराणिक मान्यता के अनुसार यह पर्वत ५००० साल पहले तक ३० हजार मीटर ऊँचा हुआ करता था, परन्तु अब इसकी ऊंचाई भुत कम हो गयी हे |

*गोवेर्धन पर्वत की परिक्रमा का महत्व-

राधाकुंड से तीन मिल दूर यह पर्वत हे |इस पर्वत की परिक्रमा कर लोग भगवान् श्री कृष्ण की भक्ति में लीन हो जाते हे|
गोवेर्धन पर्वत की परिक्रमा का कृष्णा भक्तो में बहुत ही महत्व माना जाता हे|इस पर्वत की परिक्रमा के लिए विश्वभर से कृष्णा भक्त आते हे| यह पूरी परिक्रमा सात कोस अर्थात २१ किलोमीटर की हे|परिक्रमा शुरू होते ही वहा एक बहुत ही प्रसिध दानघाटी मंदिर हे | यहा लोग दंडोती परिक्रमा करते हे जिसके चलते पहले लोग अपने दोनो हाथों को फेला कर आगे की और लेट जाते हे|एक बार में जहा तक हाँथ फैलते हे वह पर एक लकीर खींचकर फिर उसके आगे लेटते हे| इसी प्रकार लोग लेटते-लेटते शाश्टांग दंडवत करते-करते परिक्रमा करते हे, जो एक सप्ताह से दो सप्ताह में पूरी होती हे|

दान घाटी का श्रीकृष्ण मंदिर

*श्री कृष्ण भी उठा चुके हे गोवेर्धन पर्वत,जानिए क्यों?

परिक्रमा स्थल के पास बने मंदिर में बनायी गयी हे, गोवेर्धन को उठाते हुए श्री कृष्ण की ये झांकी |

 

श्री कृष्ण गोवेर्धन पर्वत उठाते हुए

ब्रज भूमि को श्री कृष्ण की लीलास्थली कहा जाता हे |यही वो जगह हे जहा श्री कृष्ण ने अपनी चिठी ऊँगली पर गोवेर्धन पर्वत को उठा लिया था | भगवान श्री कृष्ण ने द्वापर युग में ब्रजवासियों की रक्षा के लिए यह पर्वत उठाया था | इसका कारण यह था की वृन्दावन,मथुरा और गोकुल के लोगो को क्रोधित इंद्र के द्वारा की गयी वर्षा से बचाना था| वहा के लगो ने श्री कृष्णा के द्वारा उठाये गये पर्वत के निचे इक्कठा होकर अपनी जान बचायी |वहा के लोग इंद्र से बहुत डरते थे और डर की वजह से इंद्र की पूजा भी करते थे| तभी श्री कृष्ण ने कहा की इंद्र से डरने की जरुरत नहीं हे, में हु ना में बचाऊंगा आप सभी को इंद्र के प्रकोप से और तभी उन्होंने गोवेर्धन पर्वत को अपनी चिठी ऊँगली पर उठा लिया|

गोवेर्धन के पास ही दान घाटी और श्री नाथ जी का मंदिर –

दान घटी का वो मंदिर जहा पर श्रीकृष्ण ने लोगो से दान माँगा था और यही राधा ने भी दान दिया था |

श्री नाथ जी का मंदिर जहा श्रीकृष्ण के भक्त सूरदास उनके भजन गाया करते थे |