जानिए क्या है श्राद्ध पक्ष में कौए, श्वान और गाय का महत्व..!!!

जानिए क्या है श्राद्ध पक्ष में कौए, श्वान और गाय का महत्व..!!!

 श्राद्ध पक्ष में गाय, श्वान और कौए के लिए ग्रास निकालने की परंपरा है
श्राद्ध पक्ष में गाय, श्वान और कौए के लिए ग्रास निकालने की परंपरा है

ब्राह्मणपुराण में लिखा है कि आश्विन मास के कृष्ण पक्ष में यमराज यमपुरी से पितरों को मुक्त कर देते हैं और वे संतों और वंशजों से पिण्डदान लेने को धरती पर आ जाते हैं। श्राद्ध पक्ष में पितर, ब्राह्मण और परिजनों के अलावा पितरों के निमित्त गाय, श्वान और कौए के लिए ग्रास निकालने की परंपरा है। वर्ष में केवल एक बार श्राद्ध सम्पन्न करने और कौवा, श्वान (कुत्ता), गाय और ब्राह्मण को भोजन कराने से यह ऋण कम हो जाता है ।

श्राद्ध में कौए, श्वान और गाय का महत्व

* गाय में देवताओं का वास माना गया है, इसलिए गाय का महत्व है।

* श्वान और कौए पितरों के वाहक हैं। पितृपक्ष अशुभ होने से अवशिष्ट खाने वाले को ग्रास देने का विधान है।

* दोनों में से एक भूमिचर है, दूसरा आकाशचर। चर यानी चलने वाला। दोनों गृहस्थों के निकट और सभी जगह पाए जाने वाले हैं।

* श्वान निकट रहकर सुरक्षा प्रदान करता है और निष्ठावान माना जाता है इसलिए पितृ का प्रतीक है।

* कौए गृहस्थ और पितृ के बीच श्राद्ध में दिए पिंड और जल के वाहक माने गए हैं।

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