आज पढ़िए श्राद्ध से जुड़ी खास बातें जो हर किसी को पता होनी ही चाहिए..!!!

श्राद्ध पक्ष को काफी महत्वपूर्ण माना जाता है
श्राद्ध पक्ष को काफी महत्वपूर्ण माना जाता है

अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति और उन्हें प्रसन्न करने के लिए श्राद्ध पक्ष को काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। बता दें इस साल 6 सितंबर से श्राद्ध पक्ष की शुरूआत हो रही है। आज हम आपको श्राद्ध पक्ष से जुड़ी कुछ खास और जरूरी बातें बताने जा रहे हैं, जो हर किसी को पता होनी ही चाहिए और जिन्हें ध्यान में रखकर आप ना सिर्फ अपने पितरों को प्रसन्न कर सकते हैं बल्कि पितृ दोष से भी मुक्ति पा सकते हैं।

  • ग्रंथों में तीन पीढि़यों तक श्राद्ध करने का विधान बताया गया है।
  • श्राद्ध का सबसे अच्छा वक्त तब होता है जब सूर्य की छाया पैरों पर पड़ने लगे यानी दोपहर के बाद ही श्राद्ध कर्म करना चाहिए। क्योंकि सुबह-सुबह या 12 बजे से पहले किया गया श्राद्ध पितरों तक नहीं पहुंच पाता है।
  • पितृ पक्ष में देवकार्य से भी ज्यादा पितृ कार्य को महत्व दिया जाता है।

  • पूर्णिमा से लेकर अमावस्या के बीच अपने घर परिवार के पूर्वजों के लिए जो श्राद्ध कार्य किए जाते हैं उससे पितृ दोष से मुक्ति मिलती है।
  • पूर्वजों की पूजा हमेशा दक्षिण दिशा की ओर मुंह करके ही करनी चाहिए।
  • श्राद्ध पक्ष में सारे पितृ पृथ्वी पर भ्रमण करते हैं इसलिए इस दौरान किसी भी तरह का मांगलिक कार्य नहीं करना चाहिए। लेकिन एक मान्यता के अनुसार श्राद्ध में खरीदारी करना शुभ माना जाता है।

  • पौराणिक मान्यताओं के अनुसार कौए को पितरों का ही रुप माना जाता है। कहा जाता है कि पितृ पक्ष के दौरान श्राद्ध ग्रहण करने के लिए हमारे पितृ कौए का रुप धारण करके नियत तिथि पर दोपहर के समय हमारे घर आते हैं। यही वजह है कि श्राद्ध का प्रथम अंश हमेशा कौओं को अर्पित किया जाता है।
  • अपने पितरों तक आहार और अपनी श्रद्धा पहुंचाने का एकमात्र साधन श्राद्ध ही है।

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