इस 800 साल पुराने शिव मँदिर मे झूठी कसम खाने पर शिव देते है ऐसी सजा जिसके बारे मे आप कल्पना भी नहीं कर सकते!!!

जानिये इस 800 साल पुराने शिव मँदिर मे झूठी कसम खाने पर शिव देते है ऐसी सजा जिसके बारे मे आप कल्पना भी नहीं कर सकते!!!

शिव की महिमा से तो हर मनुष्य वाकिफ है जो भी शिव की सच्चे मन से भक्ति पूजा करता है शिव उसे वारे न्यारे कर देते है पर जो भी शिव की महिमा को झूठलाता है उसे शिव सिर्फ सजा ही देते है।

गवालियर शहर से महज़ 80 किलोमीटर दूरी पे एक भिंड नमक जगह है जिसके बीचो-बीच एक ऐतिहासिक मंदिर है।  ये मंदिर इतना सुन्दर है की सिर्फ भारत से ही नहीं बल्कि विदेशों से भी लोग यहाँ आते है।  इस मंदिर का निर्माण  800 साल पहले 11 वीं सदी में महान राजा पृथ्वीराज चौहान ने करवाया था ।  जी हाँ, हम बात कर रहे है वनखंडेश्वर महाराज मंदिर की । आपको बता दें की इस मंदिर की स्थापना के बाद से अब तक यहाँ अखंड ज्योति जल रही है । हर साल लाखों लोग शिवजी महाराज के दर्शन करने यहाँ आते है।

इस 800 साल पुराने शिव मँदिर मे झूठी कसम खाने पर शिव देते है ऐसी सजा जिसके बारे मे आप कल्पना भी नहीं कर सकते!!!
इस 800 साल पुराने शिव मँदिर मे झूठी कसम खाने पर शिव देते है ऐसी सजा जिसके बारे मे आप कल्पना भी नहीं कर सकते!!!

यहाँ कोई नहीं खा सकता झूठी कसम

इस मंदिर में ऐसी मान्यता है की कोई भी यहाँ झूठी कसम नहीं खा सकता। अगर कोई व्यक्ति ऐसा करता है तो उसकी साथ कोई न कोई अनहोनी घटना होनी निश्चित है। आपको बता दें की वनखंडेश्वर महाराज जी के इस मंदिर में जो कोई भी सोमवार के दिन पूरे मन से पूजा अर्चना करता है उसकी हर मुराद पूर्ण होती है। इस मंदिर में अखंड ज्योति 11 वीं सदी से निरंतर जल रही है। अगर आपको किसी चोर या डकैत पे संदेह है तो आप उसे यहाँ सौगंध खिलवा दीजिये।  अगर वह व्यक्ति सच बोल रहा है तो उसे कुछ नहीं होगा लेकिन अगर वह झूठा है तो बर्बाद हो जायेगा।  यहाँ आस पास के कई लोग संदेही चोरो या डकैतों को सौगंध खिलवाने लेकर आते है।

महाशिवरात्रि के पर्व पे यहाँ भक्तो का मेला लगता है और गंगाजल से महादेव का अभिषेक भी किया जाता है।  आपको भी वनखंडेश्वर मंदिर एक बार तो ज़रूर जाना चाहिए ताकि हिन्दू धर्म के एक और अद्भुत चमत्कार को आप अनुभव कर सके।

मंदिर से जुड़ी किवदंती

किवदंती है कि मंदिर के स्थान पर केवल जंगल था।  राजा पृथ्वीराज चौहान ने भिंड से गुजरते वक्त यहां अखंड ज्योति जला शिव की आराधना की थी। इस मंदिर का निर्माण कराया था।  तभी से इस मंदिर को वनखंडेश्वर महादेव मंदिर के नाम से जाना जाता है और दूर दराज से भक्त कांवर लेकर और अपनी मुरादें लेकर इस मंदिर में आते हैं।