जानिये इस एकमात्र अनोखे मँदिर में शिवलिंग कि नहीं बल्कि होती है शिव के पैर के अंगूठे की पूजा!!

इस मंदिर में मूर्ति की नहीं बल्कि महादेव के अंगूठे की पूजा होती है!!!

दुनियाभर में भगवान शिव के कई मंदिर हैं। सभी मंदिर की अपनी कोई न कोई विशेषता भी है। भगवान शिव के जितने भी मंदिर हैं, सभी जगह या तो उनके शिवलिंग की पूजा की जाती है या मूर्ति की, लेकिन राजस्थान के माउंट आबू के अचलगढ़ का अचलेश्वर महादेव मंदिर बाकी सभी मंदिरों से अलग है। क्योंकि, इस मंदिर में भगवान शिव के शिवलिंग या मूर्ति की नहीं बल्कि उनके पैर के अंगूठे की पूजा की जाती है।
इस मंदिर में मूर्ति की नहीं बल्कि महादेव के अंगूठे की पूजा होती है
इस मंदिर में मूर्ति की नहीं बल्कि महादेव के अंगूठे की पूजा होती है
राजस्थान के एक मात्र हिल स्टेशन माउंट आबू को अर्धकाशी के नाम से भी जाना जाता है क्योकि यहां पर भगवान शिव के कई प्राचीन मंदिर हैं। पुराणों के अनुसार, वाराणसी भगवान शिव की नगरी है तो माउंट आबू भगवान शंकर की उपनगरी। अचलेश्वर माहदेव मंदिर माउंट आबू से लगभग 11 किलोमीटर दूर उत्तर दिशा में अचलगढ़ की पहाड़ियों पर किले के पास है।
दुनियाभर में भगवान शिव के कई मंदिर हैं। सभी मंदिर की अपनी कोई न कोई विशेषता भी है। भगवान शिव के जितने भी मंदिर हैं, सभी जगह या तो उनके शिवलिंग की पूजा की जाती है या मूर्ति की, लेकिन राजस्थान के माउंट आबू के अचलगढ़ का अचलेश्वर महादेव मंदिर बाकी सभी मंदिरों से अलग है। क्योंकि, इस मंदिर में भगवान शिव के शिवलिंग या मूर्ति की नहीं बल्कि उनके पैर के अंगूठे की पूजा की जाती है।
राजस्थान के एक मात्र हिल स्टेशन माउंट आबू को अर्धकाशी के नाम से भी जाना जाता है क्योकि यहां पर भगवान शिव के कई प्राचीन मंदिर हैं। पुराणों के अनुसार, वाराणसी भगवान शिव की नगरी है तो माउंट आबू भगवान शंकर की उपनगरी। अचलेश्वर माहदेव मंदिर माउंट आबू से लगभग 11 किलोमीटर दूर उत्तर दिशा में अचलगढ़ की पहाड़ियों पर किले के पास है।