क्यों शनि देव ने दिया अपने ही पिता को दंड….!!!!

क्यों शनि देव ने दिया अपने ही पिता को दंड

न्याय प्रिय शनिदेव

शनि देव, एक ऐसे देवता हे जिन्हें  न्याय का देवता माना गया है, उनके प्रकोप से हर कोई भयभीत रहता है। शनि की ढैय्या हो या साढ़े साती, हर किसी के लिए यह समय काटना मुश्किल बन जता है क्योंकि ये वही समय होता है जब शनि देव से आपको आपके कर्मो के अनुसार दंड मिलता हैं।कई लोग इन्हें कठोर मानते हैं क्योंकि इनके प्रकोप से बड़े से बड़ा धनवान भी दरिद्र बन जाता है। परंतु ऐसा सही नहीं है। दरअसल शनि देव न्याय के अधिकारी है और उनका न्याय निष्पक्ष होता है। निष्पक्ष न्याय में दंड भी मिलता है।शनि देव के जीवन से जुड़ी कई प्रमुख बातें हैं जिनमें उनका बचपन सबसे प्रमुख है। हिन्दू मान्यतानुसार शनि देव का जन्म सूर्यदेव की दूसरी पत्नी छाया के गर्भ से हुआ था। जिस समय शनि देव गर्भ में थे माता छाया शिवजी की पूजा में लीन रहती थीं। उन्हें अपने खाने-पीने का ध्यान तक नहीं होता था । इस कारण शनि देव का रंग  काला हो गया और वे कमजोर बालक के रूप में जन्में।

भगवान सूर्य का व्यक्तित्व बहुत आकर्षक था । शनि देव का रंग देख सूर्यदेव क्रोधित हो उठे और अपनी पत्नी छाया पर आरोप लगाया कि शनि देव उनके पुत्र नहीं हैं, उन्होंने अपनी संतान को देखा तो उसकी कुरूपता की वजह से उन्होंने उसे स्वीकार करने से इनकार कर दिया। सूर्य देव ने ना सिर्फ अपनी संतान बल्कि अपनी पत्नी छाया का भी त्याग कर दिया।

सूर्य देव के इस व्यवहार ने शनिदेव और उनकी माता छाया, दोनों को बहुत आहत किया। उनके पिता भगवान सूर्य ने ऐसा किया इस वजह से उन्होंने ठान लिया उन्हें अपने पिता जैसे दोषियों को दंड देना हैं । अपने पिता के समान अलौकिक शक्तियां, दृष्टि और अधिकार प्राप्त करने के लिए उन्होंने अपने बचपन, किशोरावस्था और युवावस्था का त्याग कर दिया और सारा समय महादेव की तपस्या में लगा दिया।भगवान शिव की कठोर तपस्या कर शनि देव ने उनसे यह वरदान हासिल कर लिया था कि वह सभी के पापों का हिसाब रखकर उन्हें उसी के अनुसार दंड देंगे।शनि देव को महादेव से मिले वरदान के अनुसार वह ना सिर्फ मनुष्य बल्कि देवताओं और भगवान के भी बुरे कर्मों का हिसाब रख सकते थे और उन्हें दंड भी दे सकते थे।

इस वरदान को हासिल करने के बाद शनि देव को भी देवता का दरजा मिल गया और उनकी नजर को ‘कुदृष्टि’ की शक्ति मिल गई। अब वह जिस किसी पर भी अपनी कुदृष्टि डालेंगे उसका विनाश होना निश्चित था, फिर चाहे वो कोई भी हो, देवता, नाग, मनुष्य, असुर। कुदृष्टि हासिल करते ही सबसे पहले शनि देव ने अपने पिता को उनके कर्मों के फलस्वरूप दंड दिया।

न्याय प्रिय शनिदेव

शनि देव निष्पक्ष न्याय करते हे अतः जो भी आदमी किसी दूसरे के साथ बुरा करता हे शनि देव उसको दंड जरूर देते हे ।

॥जय शनिदेव ॥

 

Deepika Gupta