शनि की कुद्रष्टि से बचने के लिए करे शनिवार को ये व्रत…!

शनि की कुद्रष्टि से बचने के लिए करे शनिवार को ये व्रत…!

शनि का प्रकोप किसी भी व्यक्ति पर भारी पड़ सकता है| शनि की कुद्रष्टि उन्ही लोगो पर पड़ती है जो गलत काम करत है| शनि के प्रकोप से कोई भी नहीं बच पता| शनि की कुद्रष्टि से राजा भी रैंक हो जाता है| शनिदेव को हिन्दू धर्म का न्यायाधीश कहा जाता है| भगवान शनि यदि आपसे प्रसन्न होते है तो वो आप पर कभी भी अपनी कुद्रष्टि आप पर नहीं डालेंगे | यदि आप चाहते है की आप पर शनि की कुद्रष्टि नहीं पड़े और वे आपसे सदैव प्रसन्न रहे तो आपको शनिवार के दिन एक आसान व्रत करना पड़ेगा जिसके फल स्वरूप आपको कभी भी  शनि की कुद्रष्टि का सामना नहीं करना पड़ेगा| श्रावण मास में शनिवार का व्रत प्रारंभ करने का विशेष महत्व है।

शनिवार को रखे ये व्रत

शनिवार को इस प्रकार से करे व्रत-

1. शनिवार के दिन सर्वप्रथम ब्रह्म मुहूर्त  में उठे और कुए के शुद्ध जल से स्नान करे|

2. स्नान के बाद पीपल के पेड़ पर जल अर्पण करे|

3. तत्पश्च्यात शनि देव की मूर्ति के पंचामृत अभिषेक करे|

4. फिर इस मूर्ति को चावलों से बनाए चौबीस दल के कमल पर स्थापित करें।

5. इसके बाद काले तिल, फूल, धूप, काला वस्त्र व तेल आदि से पूजा करें।

6. पूजन बाद कोणस्थ, कृष्ण, पिप्पला, सौरि, यम, पिंगलो, रोद्रोतको, बभ्रु, मंद, शनैश्चर  शनि के इन निम्न नामों का जाप करे |

7. पूजन के बाद पीपल के वृक्ष के तने पर सूत के धागे से सात परिक्रमा करें।

अंत में शनिदेव के इस लाभकारी मंत्र का जाप कर अपनी सुख सम्रद्धि की प्रार्थना शनिदेव से करे :

शनैश्चर नमस्तुभ्यं नमस्ते त्वथ राहवे।
केतवेअथ नमस्तुभ्यं सर्वशांतिप्रदो भव॥ 

इसी तरह सात शनिवार तक व्रत करते हुए शनि के प्रकोप से सुरक्षा के लिए शनि मंत्र की समिधाओं में, राहु की कुदृष्टि से सुरक्षा के लिए दूर्वा की समिधा में, केतु से सुरक्षा के लिए केतु मंत्र में कुशा की समिधा में, कृष्ण जौ, काले तिल से 108 आहुति प्रत्येक के लिए देनी चाहिए। अपनी इच्छानुसार ब्राहमणों को भोज कराये और दान में लोहे की कोई भी वास्तु या धन दे|