जानिये किस तरह बनाये शनि देव को अपना मित्र जिससे आपको मिले शनि के कोप से मुक्ति….

इस तरह के लोगो को शनि की दशा के दौरान अधिक कष्ट झेलना नहीं पड़ता !!!

कहते है शनिदेव को खुश करना आसान नहीं होता उनके प्रकोप से हर मनुष्य डरता है लेकिन कहा जाता है कि अगर शनि देव एक बार खुश हो जाएँ तोह हमे किसी भी तरह की परेशानी, समस्या का सामना नहीं करना पड़ता है ।न्याय के देव, शनिदेव के बारे में तो हम सभी जानते है, शनिदेव पक्ष रहित होकर मनुष्य के कर्मों का फल देते है।शनिदेव उन लोगो को सुख और वैभव प्रदान करते है जो अपने जीवन मे अच्छे कर्म करते है ।और जो अपने जीवन मे बुरे कर्म करते है न्याय के देवता शनिदेव उन्हे दंद, श्राप देते है।

इस तरह के लोगो को शनि की दशा के दौरान अधिक कष्ट झेलना नहीं पड़ता
इस तरह के लोगो को शनि की दशा के दौरान अधिक कष्ट झेलना नहीं पड़ता

माना जाता है की जो लोग भक्ति भाव और श्रद्धा से शनिदेव का पूजन करते है वह पाप करने से बच जाते है। ये भी माना जाता है की इस तरह के लोगो को शनि की दशा के दौरान अधिक कष्ट का सामना नहीं करना पड़ता है।

 जहाँ एक ओर शनि की साढ़े साती और ढैय्या में इंसान को हर समस्या का सामना करना पड़ता है। वही दूसरी ओर जो लोग पुरे भक्तिभाव के साथ शनि देव की पूजा करते है उन्हें सुख-समृद्धि का आशीर्वाद भी देते है। पुराणों में शनि देव को प्रसन्न करने के लिये और शनि कि दशा जेसे शनि की ढैय्या, शनि की साढ़े साती के अशुभ प्रभावो से बचने के लिए व्रत आदि का विशेष महत्त्व बताया गया है।शनिवार को शनिदेव का दिन कहा जाता है, इसलिए उन्हें प्रसन्न करने के लिए शनिवार को व्रत पूजन किया जाता है। यूँ तो आप वर्ष के किसी भी शनिवार के दिन आप इस व्रत की शुरुआत कर सकते है।
– इस व्रत को करने के लिए मनुष्य का पवित्र होना ज़रुरी है। इसके लिए सबसे पहले प्रातः ब्रह्म मुहूर्त ने स्नान करना चाहिए।
– व्रत के दिन शनिदेव की प्रतिमा का विधिविधान के साथ पूजन करना चाहिए।
– इस दिन शनि देव को लाजवंती का फूल, तिल, तेल, गुड़ आदि अर्पण करना चाहिए।
– शनिवार के दिन शनि देव के नाम का सर्स्सो के तेल का दीपक लगाना चाहिए।
–अगर आपने अपने जीवन मे कोई पाप अनजाने किया हो तोह उस पाप कि क्षमा शनिदेव से माँगना चाहिये।
– शनि देव की पूजा के बाद राहु-केतु की भी पूजा करनी चाहिए।
– शनिवार के दिन मंदिर में जाकर पीपल के पेड़ का दिया जलाना चाहिए और उसमे जल भी देना चाहिए।
– पीपल के जल देने के बाद उसकी सूत्र बांधकर सात बार परिक्रमा भी करनी चाहिए।
– देवो के देव शनिदेव का पूजन करने के लिए संध्या काल में दीप जलाकर पूजा करनी चाहिए।
शनि की दशा
शनि की दशा
– शनिदेव को भोग लगाने के लिए उडद की दाल की खिचड़ी बनाकर मंदिर में ले जाये और भगवान को भोग लगाएं।
–शनिदेव की विशेष कृपा पाने के लिये शनिवार के दिन काली चीटियों को गुड़ व् आटा डाले।
– कहा जाता है शनि देव को काला रंग बहुत प्रिय है इसीलिए इस दिन काले रंग के वस्त्र धारण करने चाहिए।
– जो शनि के प्रकोप को झेल रहे है वे शनिवार के दिन 108 तुलसी के पत्तो पर श्री राम चंद्र जी का नाम लिखकर पत्तो को एक सूत्र में पिरोकर माला बनाये। और इस माला को श्री हरी विष्णु के गले में डाले।
– शनिदेव की पूजा के लिए दान करना भी जरुरी माना जाता है। शनि के प्रकोप को कम करने के लिए शास्त्रो में बताई गयी शनि की वस्तुओ का दान करे। शास्त्रो के मुताबिक, उड़द, तेल, तिल, नीलम रत्न, काली गाय, भैंस, काला कम्बल या कपडा, लोहा या इससे बानी वस्तुये और दक्षिणा किसी ब्राह्मण को दान करनी चाहिए।
– शनि व्रत करने के लिए शुद्ध और पवित्र विचार रखना भी ज़रुरी है।
– कहते है यदि शनि आपका मित्र बन जाये तो दुःखों का जीवन में कोई स्थान नहीं रह जाता, क्योकि शनिदेव उसे सुख और शांति का वरदान दे देते है।