अगर करेंगे 25 मई को शनि जयंति के दिन इस विधि और मुहर्त मे पूजा और रखेंगे पूजा मे इन बातो का ध्यान तो शनि देव होंगे आप पर जबरदस्त मेहरबान !!

अगर करेंगे 25 मई को शनि जयंति के दिन इस विधि और मुहर्त मे पूजा और रखेंगे पूजा मे इन बातो का ध्यान तो शनि देव होंगे आप पर जबरदस्त मेहरबान !!

जेष्ठ माह के अमावस्या को शनि जयंती के रुप में मनाया जाता है माना जाता है कि इस दिन शनिदेव की पूजा करने से सारे शनि के कोप समाप्त हो जाते हैं और उनसे बचा भी जा सकता है यदि पहले से ही कहीं शनि के प्रकोप झेल रहा है ।तो उसके लिए यह दिन बहुत ही कल्याणकारी हो सकता है। आइए जानते हैं कैसे करें शनिदेव की पूजा और क्या है उसका महत्व।

शनिदेव की पूजा भी बाकी देवताओं की पूजा की तरह सामान्य होती है। प्रातकाल उठकर शौचादि से निवृत्त होकर स्नान आदि ही से शुरू होकर फिर लकड़ी के एक पाठ पर काला वस्त्र बिछाकर उस पर शनि देव की प्रतिमा या तस्वीर या फिर एक सुपारी रखकर उसके दोनों ओर शुद्ध घी व तेल का दीपक लगाकर धूप जलाएं। शनि देवता के इस प्रतीक स्वरुप को पंचगव्य पंचामृत इत्यादि से स्नान करवाए। इसके बाद अबीर गुलाल सिंदूर कुमकुम व काजल लगाकर नीले या काले फूल अर्पित करें ।इसके बाद इमरती व तेल में तली वस्तुओं का नैवेद्य अर्पण करें इसके बाद श्रीफल सहित अन्य फल भी अर्पित करें। पंचोपचार पूजन के बाद शनि मंत्र का कम से कम एक माला जप भी करना चाहिए माला जपने के पश्चात शनि चालीसा का पाठ करें तत्पश्चात शनि महाराज की आरती उतारनी चाहिए।

इन बातों का रखें ध्यान

शनि देव की पूजा करने के लिए सूर्योदय से पहले शरीर पर तेल मालिश कर स्नान करना चाहिए।

शनि मंदिर के साथ-साथ हनुमान जी के दर्शन भी जरूर करने चाहिए।

शनि जयंती या शनि पूजा के दिन ब्रम्हचर्य का पालन करना चाहिए।

इस दिन यात्रा को भी स्थगित कर देना चाहिए।

किसी जरूरतमंद गरीब व्यक्ति को तेल से बने खाद्य पदार्थों का सेवन करवाना चाहिए।

गाय और कुत्ते को भी तेल से बने पदार्थ खिलाने चाहिए।

सूर्यदेव की पूजा इस दिन नहीं करें तो अच्छा है।

शनि देव की प्रतिमा या तस्वीर को देखते समय उनकी आंखों में नहीं देखना चाहिए।

शनि जयंती का मुहूर्त

अमावस्या तिथि आरंभ 5:00 बज कर 7 मिनट पर( 25 मई 2017)
अमावस्या तिथि समाप्त 1:14 पर( 26 मई 2017)

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