क्या आप जानते है सावन के महीने में हुआ था समुद्र मंथन..!!नहीं जानते तो जरूर पढ़े..!!!

क्या आप जानते है सावन के महीने में हुआ था समुद्र मंथन..!!नहीं जानते तो जरूर पढ़े..!!!

श्रावण मास भगवान शिव को समर्पित है और इस माह का प्रत्येक दिन भगवान शिव की पूजा के लिए पवित्र होता है। इस पावन महीने को सभी महीनों में सबसे पवित्र माना जाता है। जो श्रावण के सोमवार को व्रत रखते हैं, भोले बाबा के आशीर्वाद से उनकी समस्त इच्छाएं पूर्ण होती हैं। सावन माह को वर्षा ऋतु का महीना या पावस ऋतु भी कहा जाता है। इस माह हरियाली तीज, रक्षाबंधन, नागपंचमी आदि प्रमुख त्योहार आते हैं।

भगवान शिव को श्रावण का देवता भी कहा जाता है।

पौराणिक कथाओं के अनुसार सावन माह में ही समुद्र मंथन किया गया,जिसमें देवताओं ने अमृत पिया और हलाहल विष के पान से महादेव का कंठ नीला हो गया। विष के प्रभाव को कम करने के लिए सभी देवी-देवताओं ने उन्हें जल अर्पित किया। इसलिए इस माह शिवलिंग पर जल अर्पित करने का विशेष महत्व है। शास्त्रों में कहा गया है कि सावन माह में भगवान विष्णु योगनिद्रा में चले जाते हैं। सृष्टि के संचालन का उत्तरदायित्व भगवान शिव

ग्रहण करते हैं। इसलिए सावन के प्रधान देवता भगवान शिव बन जाते हैं।

सावन माह में माता पार्वती ने निराहार रहकर कठोर व्रत किया और भगवान शिव को प्रसन्न कर उनसे विवाह किया। इसलिए यह माह भोले बाबा को प्रिय है। भगवान शिव को सावन माह प्रिय होने का एक कारण यह भी है कि माना जाता है कि प्रत्येक वर्ष सावन माह में भगवान शिव अपनी ससुराल

आते हैं। भूलोक वासियों के लिए शिव कृपा पाने का यह उत्तम समय होता है।

बाबा भोले अपने भक्तों पर अपनी कृपा बरसाते रहें ।

॥ जय महाकाल ॥

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