सावन के गुरुवार में शिव हर लेंगे दुर्भाग्य..!!!

सावन के गुरुवार में शिव हर लेंगे दुर्भाग्य..!!!

बृहस्पति ज्ञान के देवता हैं और गुरुवार का दिन उन्हीं को समर्पित हैं सावन के महीने में पृथ्वी पर हर ओर हरियाली की मखमली चादर पसर जाती है। प्रकृति की समस्त कृतियां अपने सर्वोत्तम स्तर पर होती हैं। शिव और सावन एक-दूसरे के पूरक हैं। आज हम आपको एक उपाय बता रहें है जो आपको बृहस्पति देव के दिन गुरुवार को करना होगा जिसमे भगवान शिव ताड़केश्वर बनकर आपके दुर्भाग्य को ताड़ लेंगे यानी की हर लेंगे ।

ताड़केश्वर महादेव उपाय:

गुरूवार को पीले रंग के कपड़े पहनें, शिव पूजा हेतु पीले आसान का प्रयोग करें। शुद्ध घी में हल्दी मिलाकर दीपक करें। धूप जलाएं। पीले फूल चढाएं। पीत चंदन से शिवलिंग अथवा महादेव के चित्र पर त्रिपुंड बनाएं। केसर मिश्रित दूध शिवलिंग तथा महादेव के चित्र पर अर्पित करें। पीतल के लोटे में पानी और शहद मिलाकर शिवलिंग का अभिषेक अथवा महादेव के चित्र पर पत्ते से चढाएं। भोग स्वरुप केला अर्पित करें और ताड़केश्वर शिव के मंत्र का एक माला जाप करें।

मंत्र: ॐ स्त्रों ताड़केश्वर रुद्राय ममः दुर्भाग्य नाशय नाशय फट।।

इस उपाय से निश्चित ही कुछ ही समय में दुर्भाग्य आपके घर का रास्ता भूल जाएगा। इस उपाय से जीवन से दुर्भाग्य के कारण उत्त्पन्न सारी परेशानीयां दूर होती हैं। व्यक्ति धर्म मार्ग पर अग्रसर होता है तथा परमेश्वर शिव भक्त को भवसागर से तार देते हैं।

रूद्र सहिंता अनुसार ताड़केश्वर महादेव का संबंध ताड़ के वृक्षों से है। मान्यतानुसार ताड़कासुर वध उपरांत भगवान शंकर इस स्थान पर विश्राम किया

था जब माता पार्वती ने देखा कि भगवान शिव को सूर्य की गर्मी लग रही है तो माता पार्वती ने स्वयं देवदार के वृक्षों का रूप धरा और भगवान शंकर को छाया प्रदान की। ताड़केश्वर महादेव के प्रांगण में आज भी वे सात ताड़ के पेड़ विराजमान हैं। रामायण में भी ताड़केश्वर का वर्णन एक पवित्र तीर्थ के रूप् में मिलता है।

॥हर हर महादेव ॥