आज जानिए यहाँ आज भी मौजूद है समुद्र मंथन का मंदराचल पर्वत…!!!

आज जानिए यहाँ आज भी मौजूद है समुद्र मंथन का मंदराचल पर्वत…!!!

समुद्र मंथन:मंथन करते देवतागण और राक्षस

समुद्र मंथन के बारे में तो आप सब ने सुना ही होगा । अमृत का नाम सुनते ही आपको दिमाग में इस पौराणिक घटना स्मरण हो जाता है मंथन करते देवतागण और राक्षस. जिसके बाद समुद्र से अमृत निकता है और राक्षस उसे लेकर भाग जाते हैं. समुद्र मंथन के दौरान अमृत और विष के अलावा दूसरी कई वस्तुएं प्राप्त हुई थी। क्या यह घटना सत्य है, क्या वाकई ऐसा कुछ हुआ है अगर हाँ तो क्या इसका कोई साक्ष्य मौजूद है? क्या इसमें कोई सच्चाई है कि समुद्र मंथन सच में हुआ था? आज हम आपको इसी उल्लेख में बता रहे है।

समुद्र में मिला पर्वत का एक टुकड़ा

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार समुद्र मंथन क्षीरसागर में हुआ था।जिस पर्वत का उपयोग हुआ उस पर्वत का नाम मंदार है और ये बिहार के बांका ज़िले में स्थित है। इस पर्वत को मंदराचल पर्वत के नाम से भी उल्लेखित किया गया है।
आर्कियोलॉजी और ओशनोलॉजी डिपार्टमेंट ने सूरत जिले के पिंजरात गांव के पास समुद्र में मंदराचल पर्वत होने का दावा किया था। आर्कियोलॉजिस्ट  के अनुसार बिहार के भागलपुर के पास भी एक मंदराचल पर्वत है, जो गुजरात के समुद्र से निकले हुए पर्वत का हिस्सा है।

पर्वत पर रस्सी जेसे निशान


उन लोगो ने बताया कि बिहार और गुजरात में मिले दोनों पर्वतों का निर्माण एक तरह के ग्रेनाइड से हुआ है. इस तरह ये दोनों पर्वत एक ही हैं।जबकि आमतौर पर ग्रेनाइड पत्थर के पर्वत समुद्र में नहीं पाए जाते हैं।खोजे गए पर्वत के बीचो बीच नाग आकृति है जिससे यह सिद्ध होता है कि यही पर्वत मंथन के दौरान इस्तेमाल किया गया होगा. गौरतलब है कि पिंजरात गांव के पास के समुद्र में 1988 में किसी प्राचीन नगर के अवशेष भी मिले थे. लोगों का यह मानना है कि वे अवशेष भगवान कृष्ण की नगरी द्वारका के हैं, इस पर्वत पर घिसाव के निशान भी हैं.
इस पर्वत पर रस्सी जैसे निशान दिखाई देते हैं, जो इस बात की ओर इशारा करते हैं कि इस पर्वत को समुद्र मंथन में मथनी के रूप में प्रयोग किया गया था। इसके अलावा इस पर्वत पर समुद्र मंथन को दर्शाती एक मूर्ति भी है।