साईं बाबा से जुड़ी बातें जिसे उनका हर भक्त जानना चाहेगा; आप भी साईं भक्त है तो जरूर जाने…!!!

गुरुवार का दिन शिर्डी के साईंबाबा का दिन माना गया है। उनके अनन्य भक्त उन पर असीम विश्वास रखते हैं औऱ मानते हैं कि सांई भक्ति से उन्हें दुनिया की हर मंज़िल मिल सकती है। चाहे वहाँ का रास्ता कितना भी कठिन हो लेकिन साईं उनकी मदद करते है और उनके जीवन के कष्टों को दूर करते है और उनकी सभी मनोकामनाएं को पूरी करते हैं।

साईं बाबा
साईं बाबा

आज हम आपको सांई बाबा से जुड़ी कुछ बाते बताते हैं जिनसे आप शायद अनजान हैं, तो आइए जानते हैं:

  • शिर्डी के साईंबाबा के जीवन औऱ उनसे जुड़ी जानकारियों का विवरण वैसे तो कईं जगह मिलता है लेकिन उन पर प्रमुख रूप से तीन किताबें लिखी गईं हैं जो कि ‘श्री सांईं सच्चरित्र’, ‘ए यूनिक सेंट सांईंबाबा ऑफ शिर्डी’ और ‘सद्गुतरु सांईं दर्शन’ (एक बैरागी की स्मरण गाथा) हैं। इन किताबों में सांईं से जुड़ी हर उस बात का ज़िक्र है जिसे उनका हर भक्त जानना चाहेगा।
साईं बाबा
साईं बाबा
  • शिर्डी के साईंबाबा का जन्म महाराष्ट्र के परभणी जिले के पाथरी गांव में 27 सितंबर 1830 को हुआ था। यहां सांई बाबा के जन्म स्थान पर एक मन्दिर भी बना हुआ है जिस में सांई बाबा की प्रतिमा स्थापित है। यहां मौजूद है उनके कुछ सामान।

  • शिर्डी के साईंबाबा के पिता का नाम परशुराम भुसारी और माता का नाम अनुसूया था जिन्हें गोविंद भाऊ और देवकी अम्मा भी कहा जाता था। अपने पांच भाई-बहनों में सांई बाबा तीसरे नम्बर पर थे।
  • ऐसा कहा जाता है कि पिता की मृत्यु के बाद पाथरी से बाबा को वली नामक एक सूफी फकीर लेकर चले गए इसके बाद बाबा के जीवन के एक नए अध्याय की शुरूआत हुई।
भक्तों के साईं नाथ
भक्तों के साईं नाथ
  • एक फकीर के रूप में विचरण करते हुए सांई घूमते-फिरते शिर्डी पहुंचे। वहां बाबा ने सबसे पहले खंडोबा मंदिर के दर्शन किए फिर नीम के पेड़ के पास पहुंच गए। नीम के पेड़ के नीचे उसके आसपास एक चबूतरा बना था।
  • जब गाँव वालो ने उन्हें देखा तो वो चौंक गये क्योंकि इतने युवा व्यक्ति को इतनी कठोर तपस्या करते हुए उन्होंने पहले कभी नहीं देखा. वो ध्यान में इतने लींन थे कि उनको सर्दी, गर्मी और बरसात का कोई एहसास नही होता था।

  • दिन में उनके पास कोई नहीं होता और रात को वो किसी से नही डरते थे। उनकी इस कठोर तपस्या ने गाँववालों का ध्यान उनकी ओर खींचा और कई धार्मिक लोग रोज उनको देखने के लिये आते थे।
  • साईं बाबा एक दिन अचानक गाँव से चले गये और किसी को पता नहीं चला। तीन साल तक शिरडी में रहने के बाद वे अचानक से गायब हो गये, उसके बाद एक साल बाद वो फिर शिरडी लौटे और हमेशा के लिए वहां बस गये।
साईं एक फ़क़ीर के रूप में शिर्डी पहुँचे
साईं एक फ़क़ीर के रूप में शिर्डी पहुँचे
  • सन् 1858 में बाबा सिरडी वापस लौटे थे, लेकिन उनकी वेशभूषा कुछ अलग सी हो गयी थी, जिसमें उन्होंने घुटनों तक एक कफनी बागा और एक कपड़े की टोपी पहन रखी थी।

  • कहीं जगह ना मिलने पर बाबा ने एक जर्जर मस्जिद में अपना घर बना लिया और वहीं अपने दिन बिताने लगे।
शिर्डी के साईंबाबा
शिर्डी के साईंबाबा
  • वहां बाबा ने एक लौ जलाई और उसमें से निकलने वाला राख लोगों को देते थे जिससे लोगो की बीमारी दूर होने लगी।  ऐसा माना जाता है कि उस राख में चिकित्सिक शक्ति थी।
  • साईं बाबा की मृत्यु 15 अक्टूबर सन् 1918 को शिरडी गाँव में ही हुयी थी। मृत्य के समय उनकी उम्र 83 वर्ष थी।
  • साईं बाबा ने अपने पीछे ना कोई वारिस और ना कोई अनुयायी को छोड़ा। आज दुनियाभर में साईं बाबा के करोड़ों भक्त हैं और रोजाना शिर्डी के मंदिर में बहुत से श्रद्धालु आकर दर्शन करते है ।

 

॥ ॐ साईं राम ॥