रविवार को तुलसी को जल देने की है मनाही ;जानिए क्यों ऐसा,भुगतना पड़ सकते है बुरे परिणाम…!!!

हिंदी धार्मिक कहानियाँ(Religious Stories in Hindi )

क्या आप जानते है शास्त्रों के अनुसार रविवार (Sunday) को तुलसी (Tulsi) के पत्ते नहीं तोड़ना चाहिए।

साथ ही इस दिन तुलसी (Tulsi) तो जल भी नहीं दिया जाना चाहिए ।

तुलसी का पौधा
तुलसी का पौधा

पर ऐसा क्यों, तो आइये आज जानते है इसके पीछे का कारण।

हमारे शास्त्रों में देवों के पूजन आदि के लिए विभिन्न दिन तय किए गए हैं।

इनमें से रविवार (Sunday)का दिन भगवान विष्णु (Vishnu)को सर्वाधिक प्रिय माना जाता है।

जहाँ एक तरफ रविवार (Sunday)उनका प्रिय दिन है वहीं तुलसी भी विष्णु प्रिया मानी जाती हैं।

इसलिए कहते है की रविवार (Sunday) के दिन पत्ते नहीं तोड़े जाते हैं।

तुलसी
तुलसी

ऐसा भी माना जाता है कि विष्णु (Vishnu) भक्त होने की वजह से रविवार (Sunday) को देवीतुलसी उनकी भक्ति में लीन रहती हैं।

उनकी तपस्या भंग न हो इसलिए रविवार (Sunday) के दिन गमले में पानी भी नहीं दिया जाता है।

धार्मिक कहानियाँ (Religious Stories)

सप्ताह के सातों दिनों में शनिवार (Shaniwar) और मंगल (Mangalwar)को क्रूर तो शनि को अशुभ वार माना जाता है।

इसलिए मंगल और शनिवार को भी पत्ते तोड़ना निषेध है।

तुलसी विवाह
तुलसी विवाह

साथ ही एकादशी भी तुलसी को प्रिय है।

देवउठनी एकादशी के दिन ही तुलसी विवाह संपन्न कराया जाता है।

इसलिए एकादशी पर  पत्ते नहीं तोड़ने चाहिए।

तुलसी से जुड़े अन्य नियम

  • विष्णु (Vishnu)पुराण के अनुसार द्वादशी, संक्रान्ति, सूर्य ग्रहण, चंद्र ग्रहण तथा संध्या काल में पत्ते नहीं तोड़ने चाहिए।
  • बिना उपयोग पत्ते कभी नहीं तोड़ने चाहिए। ऐसा करना तुलसी को नष्ट करने के समान माना गया है।
  • पत्तों को 11 दिनों तक बासी नहीं माना जाता है।
तुलसी
देवीतुलसी
  • इसकी पत्तियों पर हर रोज जल छिड़कर पुन: भगवान को अर्पित किया जा सकता है।
  • इसलिए रोजाना पत्ते तोड़ने की आवश्यकता नहीं होती है।
  • पत्ता बिना स्नान किए नहीं तोड़ना चाहिए। शास्त्रों के अनुसार यदि कोई व्यक्ति बिना नहाए ही तुलसी के पत्तों को तोड़ता है तो पूजन में ऐसे पत्ते भगवान द्वारा स्वीकार नहीं किए जाते हैं।
  • शिवजी (Shiv), गणेशजी (Ganesh)और भैरवजी (Bhairav) को तुलसी के पत्ते नहीं चढ़ाने चाहिए।

 

॥तुलसी महारानी नमो नमो हरी की पटरानी नमो नमो॥

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