पुष्य नक्षत्र कब से कब तक है जानिए शुभ समय :

पुष्य का अर्थ होता है पोषण करने वाला, ऊर्जा व शक्ति प्रदान करने वाला । मतान्तर से पुष्य को पुष्प का बिगडा़ हुआ रूप मानते हैं। पुष्य का प्राचीन नाम तिष्य शुभ, सुंदर और सुख संपदा देने वालाहै। विद्वान इस नक्षत्र को बहुत शुभ तथा कल्याणकारी मानते हैं। विद्वानपु पुष्य नक्षत्र का प्रतीक चिह्न गाय का थन मानते हैं।

11 अक्टूबर , रविवार को रवि पुष्य नक्षत्र का महासंयोग बन रहा है। रवि पुष्य नक्षत्र का विशेष फल होता है। सूर्य के दिन शनि के पुष्य नक्षत्र का होना अमृत के समान परिणाम देता है और रवि पुष्य नक्षत्रों का राजा माना जाता है। वैसे तो पुष्य नक्षत्र हर महीने आता है, लेकिन रवि पुष्य नक्षत्र का ऐसा शुभ संयोग वर्ष में एक या दो बार ही बनता है। 

इस दिन सोना-चांदी व तांबा खरीदना कई बाधाओं को दूर करने वाला होता है और घर-परिवार में अत्यं‍त सुखद स्थिति लाता है। रवि-पुष्य नक्षत्र में सोने-चांदी और तांबे की अंगूठी धारण करना श्रेष्ठ फलदायी होता है। 

इस बार अधिक मास में पुष्‍य नक्षत्र का संयोग रवि पुष्‍य के दिन बनने के कारण खरीदारी के लिए यह दिन अतिउत्तम है। इस दिन की गई खरीदारी मंगलमयी तथा स्थायी फल देने वाली मानी जाती है। जाने दिनभर के पुष्‍य नक्षत्र का शुभ समय- 

जानिए पुष्य नक्षत्र का शुभ समय :- 

इस बार पुष्य नक्षत्र का समय 10 अक्टूबर को रात 8.54 मिनट से 11 अक्टूबर रात 8.58 तक है। पुष्य नक्षत्र का शुभ समय 11 अक्टूबर , रविवार को निम्नानुसार रहेंगे। कैलेंडर के मत-मतांतर के समय कम या ज्यादा हो सकता है। 

शुभ- दोपहर 1.30 बजे से 3 बजे तक व सायंकाल 6 से 7.30 बजे तक।

  • लाभ- प्रातः 9 से 10.30 मिनट तक।
  • अमृत- सुबह 10.30 से 12 बजे तक व रात्रि 7.30 से 9 बजे तक।  
  • चर- सुबह 7.30 मिनट से 9 मिनट तक व रात्रि 9 से 10.30 बजे तक।