अद्भुत रहस्यमयी बावड़ी; जिसका पानी पीने पर हो जाती है अपनों में लड़ाई…!!!

भारतीय पौराणिक कथा (Indian Mythological Story)

हमारा भारत(Bharat) ऐसी कई जगहों को अपने में समेटा हुआ है। जिनके बारे में हर बार जानना एक नए चमत्कार की और इशारा करता है। यहाँ भारत में ऐसी बहुत सी जगह है जहाँ कई भ्रांतियां अपना घर किये बैठी है । उन्हें लोग बहुत श्रद्धा से मानते है और पूजते है। आज हम ऐसी ही एक जगह के बारे में बताने जारहे है जिसे ‘तांत्रिक बावड़ी’ के नाम से जाना जाता है।

तांत्रिक बावड़ी
तांत्रिक बावड़ी

मध्य प्रदेश के श्योपुर शहर से 20 किमी दूर एक 250 साल पुराने महल में बनी हुई है। श्योपुर जिले के गिरधरपुर कस्बे में स्थित हीरापुर गढ़ी परिसर में स्थित है तांत्रिक बावड़ी(Tantrik Bawri)।

रहस्यमयी बावड़ी

इस बावड़ी से जुडी किवदंती यह है की इस बावड़ी का पानी पीने से अपने ही लोग सगे सम्बन्धी आपस में लड़ने-झगड़ने लगते थे।

राजपरिवार और अन्य लोगों के साथ जब ऐसी घटनाएं बढ़ गईं तो शासक ने इस बावड़ी को बंद करने का फैसला लिया।

यह बावड़ी श्योपुर जिले के गिरधरपुर कस्बे में स्थित हीरापुर गढ़ी में अवशेष के रूप में मौजूद है।

तांत्रिक बावड़ी
तांत्रिक बावड़ी

यहाँ के लोगों के अनुसार बताया जाता है की राजा गिरधर सिंह गौड़ ने 250 साल पहले अपने शासनकाल में गढ़ी में 8 बावड़ियां तैयार करवाई थीं। इसमें एक बावड़ी है, जिसे तांत्रिक बावड़ी कहा जाता है।इस बावड़ी को लेकर गांव के लोग कहते हैं कि यहाँ का पानी पीने से सगे भाई भी झगड़ने लगते थे। जब राजपरिवार और अन्य लोगों के बीच ऐसी घटनाएं होने लगी तो राजा ने इस पटवा दिया।

ऐसा क्यों होता है इसके पीछे किंवदंती है कि एक नाराज तांत्रिक ने जादू-टोना कर दिया था, जिसके बाद से इस बावड़ी के पानी का ऐसा प्रभाव हो गया था। बावड़ी करीब 100 वर्ग फीट की है और यह 10 फीट गहरी है। यह बावड़ी गढ़ी परिसर में सोरती बाग में शिवजी(Shiv) के स्थान के पास स्थित है। यहां पहले आम के पेड़ थे और इस बाग में राजा अक्सर आते थे। आज यहां चार-पांच बावड़ियां बची हैं। एक बावड़ी में आज भी पानी भरा रहता है।

महल के बाहर शिवजी का मंदिर
महल के बाहर शिवजी का मंदिर

धार्मिक कथा ( Religious Story)

-इस नगर को राजा गिरधर सिंह गौड़ ने बसाया था।

-यह नगर जादूगरों और तांत्रिकों के लिए प्रसिद्ध रहा है।

-तांत्रिकों को लेकर लोगों के बीच एक किंवदंती भी प्रचलित है।

-कहते है कि एक बार दो जादूगरों के बीच कड़ा मुकाबला हुआ।

-एक जादूगर ने ताड़ के पेड़ को जादू से तोड़ दिया, तो दूसरे ने उसे जोड़ दिया ।

-पेड़ के जुड़ने में एक सिरा थोड़ा अंतर से जुड़ा।

-यह पेड़ काफी दिनों तक मौजूद रहा।

-इस पुराने नगर का नाम हीरापुर(Heerapur) है, लेकिन लोग इसे गिरधपुर कहते हैं।

-राजा गिरधर सिंह के नाम से लोग यहां के एक हिस्से को गिरधरपुर और पुराने हिस्से को हीरापुर(Heerapur) नाम से पुकारते हैं।

-यह गढ़ी आज दुर्दशा का शिकार है।

-मुख्य दरवाजे व उसके सामने मैदान में अतिक्रमण है।

राजा का महल
राजा का महल

-महल के आसपास झाड़ियां उग आई हैं।

-महल के बाहर एक शिवजी का मंदिर है, लेकिन अब उसमें देवी(Devi) प्रतिमा बैठा दी गई है।

-गढी के अंदर एक छोटे मंदिर(Mandir) में शिवलिंग(Shivling) और भैरव(Bhairav) प्रतिमा है।

-महल नष्ट होने के कगार पर है।

-दुःख इस बात का है कि अपनी पहचान को बचाने की बजाय लोग तो इसे बर्बाद करने में लगे हैं।

-राजाओं की सुंदर छत्रियां, पानी की बाबडियां बर्बादी की स्थिति में हैं।

 

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