राधा जी के कंगन से बना था यह कुंड, स्नान करने से मिलता है संतान का सुख…!!!

हम आपको एक ऐसे चमत्कारी कुंड के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसमें स्नान करके आपके घर में भी जल्द बच्चे की किलकारियां गुंज उठेंगी।

मथुरा के पास अरिता नामक गांव में 2 सरोवर हैं, जिन्हें राधा कुंड और कृष्ण कुंड कहा जाता है। कहा जाता है कि नि:संतान दंपति अहोई अष्टमी की मध्य रात्रि को इस कुंड में स्नान करते हैं तो उन्हें संतान प्राप्ति होती है।

कुंड के विषय में कहा जाता है कि कंस भगवान श्रीकृष्ण को मारना चाहते थे। जिसके लिए उन्होंने अरिष्टासुर नाम के राक्षस को भी भेजा। राक्षस ने बछड़े का रूप बनाकर श्रीकृष्ण की गायों में शामिल हो गया और बाल-ग्वालों को मारने लगा। श्रीकृष्ण ने बछड़े के रूप में छिपे राक्षस को पहचान लिया और उसका वध कर दिया। राधा ने श्रीकृष्ण से कहा कि उन्हें गौहत्या का पाप लग गया है।
श्रीकृष्ण ने इस समस्या के समाधान के लिए देवर्षि नारद ने उन्हें बताया कि वे सभी तीर्थों का आह्वान करके उन्हें जल रूप में बुलाएं और उन तीर्थों के

श्रीकृष्ण ने अपनी बांसुरी से किया कुंड का निर्माण
श्रीकृष्ण ने अपनी बांसुरी से किया कुंड का निर्माण

जल को एकसाथ मिलाकर स्नान करें। ऐसा करने से गौहत्या के पाप से मुक्ति मिल जाएगी। जिसके बाद श्रीकृष्ण ने अपनी बांसुरी से एक कुंड का निर्माण किया फिर सभी तीर्थों के जल को आमंत्रित किया अौर स्नान करके पापमुक्त हो गए। उस कुंड को कृष्ण कुंड कहा जाता है।

राधा जी ने भी श्याम कुंड के समीप ही अपने कंगन से एक कुंड खोदकर उसमें स्नान किया। जिसे राधा कुंड या कंगन कुंड भी कहा जाता है। स्नान करने के बाद राधा जी और श्रीकृष्ण ने रास रचाया था। राधा जी ने श्री कृष्ण से कहा था कि अभी वे गौ वध के पाप से मुक्त हुए हैं। वे उन्हें वरदान दें कि जो भी

इस तिथि पर राधा कुंड में स्नान करेगा उसे संतान की प्राप्ति होगी। इस पर श्री कृष्ण ने राधा जी को यह वरदान दे दिया था। दोनों कुंडों की विशेषता है कि दूर से देखने पर कृष्ण कुंड का जल काला अौर राधा कुंड का जल सफेद दिखाई देता है।

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