यहां आज भी राधा संग रास रचाते हैं कन्हैया, जिसने भी देखा यह दृश्य हो गया वो व्यक्ति पागल !! यह है प्रमाण

यहां आज भी राधा संग रास रचाते हैं कन्हैया !!

वैसे तो यह दुनिया ही रहस्यमय है। धरती अपनी धुरी पर लगातार घूमती रहती है, दिन में सूर्य खुद अपनी सेवाएं देने आ जाता है। चंद्रमा तिथि के अनुसार धरती को रोशन करता है।रात-दिन होते हैं। इनके लिए हमें किसी से कहना नहीं होता। वास्तव में दुनिया के ज्यादातर रहस्य आज भी इंसान के लिए अनजाने ही हैं।ऐसा ही एक रहस्य है निधि वन, जो वृंदावन में स्थित है। कहा जाता है कि आज भी यहां भगवान कृष्ण रास रचाते हैं। निधि वन सुबह खोला जाता है लेकिन शाम को आरती के बाद बंद कर दिया जाता है।उस समय यहां कोई नहीं रहता। यहां तक कि पशु-पक्षी भी नहीं। कहा जाता है कि जो भी रात को यहां रुक जाता है वो पागल हो जाता है।

छुपकर बैठे थे ये लोग, अगले दिन हो गए पागल

स्थानीय लोगों का कहना है कि करीब एक दशक पहले एक व्यक्ति शाम को निधि वन में छुपकर बैठ गया था। वह जानना चाहता था कि हजारों वर्षों से प्रचलित इस मान्यता के पीछे कितनी सच्चाई है, क्या वास्तव में कृष्ण यहां आते हैं? यह रहस्य जानने वह वहीं छुप गया।अगले दिन जब सुबह निधि वन के द्वार खोले गए तो वह बेहोश अवस्था में मिला। उसका मानसिक संतुलन भी बिगड़ चुका था। ऐसा ही एक और उदाहरण पागल बाबा का दिया जाता है। उनकी समाधि इसी वन में बनी हुई है।कहा जाता है कि उन्होंने भी छुपकर रास लीला देखने की कोशिश की और अपना मानसिक संतुलन खो बैठे। हालांकि वे भगवान कृष्ण के भक्त थे, इसलिए उनकी मृत्यु के बाद निधि वन में ही उनकी समाधि बनवा दी गई।

यहां आज भी शृंगार करती हैं राधाजी

निधि वन के अंदर रंग महल है। कहा जाता है कि यहां रोज रात को कृष्ण और राधाजी आते हैं। रंग महल में राधा-कृष्ण के लिए चंदन का पलंग सजाया जाता है। पलंग के निकट एक लोटा पानी, राधाजी के शृंगार में प्रयुक्त होने वाली वस्तुएं, दातुन और पान आदि रखा जाता है।अगले दिन सुबह पांच बजे रंग महल के द्वार खुलते हैं तो बिस्तर अस्त-व्यस्त मिलता है, जैसा कि किसी के बैठने से होता है। वहां रखा लोटा खाली होता है, दातुन कुचली हुई और पान खाया हुआ मिलता है।

ये पौधे रात को बन जाते हैं गोपियां

निधि वन जितना रहस्यमय है, वहां के पेड़ भी उतने ही खास हैं। आमतौर पर हर पेड़ की शाखाएं ऊपर की ओर बढ़ती हैं लेकिन निधि वन के पेड़ो की शाखाएं नीचे की ओर बढ़ती हैं।यहां तुलसी के पौधे भी बहुत खास हैं। तुलसी का हर पौधा यहां जोड़े में है। इसके बारे में मान्यता है कि जब भगवान कृष्ण रास रचाते हैं तब ये  जोड़ीदार पौधे गोपियां बन जाते हैं।यहां लगे तुलसी के पौधे को कोई नहीं तोड़ता। कहा जाता है कि जिसने भी तुलसी का पौधा ले जाने की कोशिश की, उस पर कोई प्रबल संकट आ गया। इसलिए कोई उन्हें नुकसान पहुंचाने की कोशिश भी नहीं करता।निधि वन के नजदीक कई घर भी बने हुए हैं लेकिन उनमें उस ओर खिड़कियां नहीं हैं। शाम 7 बजे बाद उस ओर कोई देखता भी नहीं। जिन लोगों ने कभी भूलवश उस ओर खिड़कियां बनवाई थीं, उन्होंने बाद में वे बंद करवा दीं।