अगर है कुंडली में कमजोर गुरु तो आज ही पहने यह रत्न !! देगा शुभ फल !!

अगर है कुंडली में कमजोर गुरु तो आज ही पहने यह रत्न !! देगा शुभ फल !!

जब जातक की कुंडली में ग्रहों की स्थिति कमजोर हो उनके जीवन में उपग्रह के शुभ प्रभाव कम हो जाते हैं। जिसमें कई बार तो जीवन में उथल-पुथल तक मिल जाती है ।ऐसे में कमजोर ग्रह को मजबूत करने के कुछ ज्योतिषीय उपाय भी ज्योतिष शास्त्र में बताए गए हैं। हर ग्रह के लिए उपाय सुझाए जाते हैं देवगुरु माने जाने वाले बृहस्पति का हमारे जीवन पर व्यापक प्रभाव पड़ता है। गुरु ज्ञान के कारक है जीवन में सुख समृद्धि के दाता हैं सुखद जीवन के लिए कुंडली में इनका मजबूत होना बहुत जरूरी है। यदि आपकी कुंडली में गुरु मजबूत नहीं है तो आप गुरु का रत्न पुखराज धारण कर सकते हैं चलिए आपको बताते हैं कि पुखराज से होने वाले लाभ के बारे में।

पुखराज दरअसल पीले रंग का एक बहुत ही मूल्यवान एवं सुंदर रचना है। जो कि बृहस्पति ग्रह की मजबूती के लिए धारण किया जाता है। पुखराज आपके लिए कितना फायदेमंद रहेगा इस बात पर भी निर्भर करता है कि जो रत्न आपने धारण किया है उसका आकार क्या है उसका रंग केसा है। तथा वह कितना शुद्ध है वैसे तो पुखराज विभिन्न रंगों के हो सकते हैं लेकिन बृहस्पति के लिए पीले रंग के पुखराज को धारण किया जाता है।

जिन जातकों की कुंडली में बृहस्पति का शुभ प्रभाव कम हो उन्हें पुखराज रत्न धारण करने की सलाह दी जाती है। धनु और मीन राशि के जातक जोकि बृहस्पति से प्रभावित होता है क्योंकि इन राशियों के स्वामी बृहस्पति माने जाते हैं इसलिए इनके लिए यह विशेष रूप से सौभाग्यशाली हो सकता है।

मान्यता है कि पुखराज धारण करने से जातक का मान सम्मान बढ़ने लगता है। व जीवन में धन संपत्ति में भी वृद्धि होने लगती है ।बृहस्पति को ज्ञान का कारक भी माना जाता है। इसलिए शिक्षा क्षेत्र में पुखराज धारण करने से सफलता मिल सकती है।  पुखराज के प्रभाव से बृहस्पति देव बली होकर जातक की बुद्धि को सत्कर्मों में लगाते हैं ।और गलत संगत से दूर रखते हैं यदि किसी जातक के दांपत्य जीवन में दिक्कत आ रही हो या फिर विवाह में विलंब हो रहा हो या अन्य रुकावटे आ रही हो तो ऐसे जातकों को भी ज्योतिषाचार्य पुखराज धारण करने की सलाह देते हैं। जिसके पश्चात उनके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन देखे जाते हैं इतना ही नहीं यदि जातक की स्वास्थ गले का कोई रोग है तो पुखराज धारण करने से उन्हें राहत मिलती है।

ज्योतिष आचार्यों के अनुसार पुखराज धारण करने के लिए पहले बृहस्पति संबंधी पीली वस्तु है। केला, हल्दी पीले वस्त्र आदि का दान करना चाहिए। पुखराज सवा पांच ,सवा नो या सवा 12 रत्ती की मात्रा में ही धारण करना चाहिए। धारण करने से पूर्व किसी विद्वान ज्योतिषाचार्य से इसकी विधिवत पूजा-अर्चना अवश्य करवानी चाहिए इसे धारण करने के लिए गुरु ग्रह बृहस्पति का दिन यानी गुरुवार उचित माना जाता है।

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