पूजा में इन धातु के बर्तनों का उपयोग शास्त्रों में वर्जित माना गया है, ये हैं वैज्ञानिक तथ्य…..

पूजा की थाली
पूजा की थाली

भगवान की पूजा हर घऱ मँदिर में की जाती है भगवान की पूजा से मन को शांति मिलती है व घऱ पवित्र हो जाता है।पूजा में बर्तनों का भी काफी महत्व है। शास्त्रों के अनुसार अलग-अलग धातु अलग-अलग फल देती है। इसके पीछे धार्मिक कारण के साथ ही वैज्ञानिक कारण भी है। सोना, चांदी, पीतल और तांबे के बर्तनों का उपयोग शुभ माना गया है। जबकि, पूजन में लोहा और एल्युमीनियम धातु से निर्मित बर्तन वर्जित किए गए हैं।

धार्मिक कारण
पूजा और धार्मिक क्रियाओं में लोहा, स्टील और एल्युमीनियम को शास्त्रों के अनुसार अपवित्र धातु माना गया है। इन धातुओं की मूर्तियां भी नहीं बनाई जाती है। लोहे में हवा और पानी से जंग लग जाता है और एल्युमीनियम से भी कालिख निकलने लगती है। जो कि हमारे स्वास्थय के लिए हानिकारक होती हैं।
एल्युमीनियम के बर्तन
एल्युमीनियम के बर्तन
वैज्ञानिक कारण
पूजन में कई बार मूर्तियों को हाथों से स्नान कराया जाता है, उस समय मूर्तियों को रगड़ा भी जाता है। ऐसे में लोहे और एल्युमीनियम से निकलने वाली जंग और कालिख का हमारी त्वचा पर बुरा प्रभाव पड़ता है। इसलिए लोहा, एल्युमीनियम को पूजा में निषेध माना गया है। पूजा में सोने, चांदी, पीतल, तांबे के बर्तनों का उपयोग करना चाहिए। इन धातुओं को रगड़ना हमारी त्वचा के लिए भी बहुत लाभदायक रहता है।
पूजा क़े बर्तन
पूजा क़े बर्तन