पूजा करने के यह तीन तरीके हर व्यक्ति को दिलाते है मनचाहा वरदान !!

पूजा करने के यह तीन तरीके हर व्यक्ति को दिलाते है मनचाहा वरदान !!

पूजा करना सनातन धर्म का अभिन्न अंग है । ईश्वर ने हमें जीवन दिया है हम उसे कैसे धन्यवाद दें  ।इसके समाधान हेतु हमारे शास्त्रों में दैनिक पूजा का विधान पूजा करने के विलन का विलन उद्देश्य होते हैं । उन में सर्वश्रेष्ठ व पवित्र उद्देश्य है । ईश्वर के प्रति अपना प्रेम व कृतज्ञता ज्ञापित करना है । पूजा का तरीका व्यक्ति की श्रद्धा पर निर्भर है । लेकिन हमारे शास्त्रों में पूजा करने के कुछ अनिवार्य अंग बताए हैं जिसे पंचोपचार, दशोपचार,षोडशोपचार पूजन कहा जाता है बताया है ।

1 पंचोपचार पूजन
पंचोपचार पूजन में निम्नलिखित सामग्री का उपयोग किया जाता है ।
गंध, पुष्प,धूप ,दीप ,नैवेद्य

2 दशोपचार
इस पूजन में निम्नलिखित सामग्री का उपयोग करके ही मनचाहा वरदान पाया जाता है ।
पाद्य, अर्घ्य, आचमन, स्नान, वस्त्र , गंध पुष्प,धूप ,दीप ,नैवेद्य


3 षोडशोपचार
इस पूजन में निम्नलिखित सामग्री का उपयोग करके मनचाहा वरदान पाया जाता है ।
पाद्य, अर्घ्य, आचमन, स्नान,वस्त्र, आभूषण,गंध,पुष्प,धूप, दीप, नेवैद्य, ताम्बूल,स्तवन पाठ, तर्पण, नमस्कार

भगवान की पूजन के यहां तीन प्रकार शास्त्रोक्त है उनके द्वारा आराधना करने से मनचाहा वरदान मिलता है । अक्षत हर पूजन में अनिवार्य है

 

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