आखिर क्यों पूजा के बाद की जाती है आरती..!!!जानिए इसके पीछे का कारण..!!!!

आखिर क्यों पूजा के बाद की जाती है आरती..!!!जानिए इसके पीछे का कारण..!!!!

क्यों पूजा के बाद की जाती है आरती
क्यों पूजा के बाद की जाती है आरती

चाहे कोई भी जगह हो घर हो या मंदिर या कोई धार्मिक स्थान या कहीं धार्मिक कार्यक्रम हो रहा हो तो भगवान की पूजा के बाद आरती की जाती है। बिना आरती के कोई भी पूजा पूरी नहीं होती है। इसलिए पूजा शुरू करने से पहले लोग आरती की थाल सजाकर बैठते हैं।  स्कंद पुराण में बताया गया है आरती करना महत्वपूर्ण क्यों होता है। इस पुराण में कहा गया है कि अगर कोई व्यक्ति मंत्र नहीं जानता, पूजा की विधि नहीं जानता लेकिन आरती कर लेता है तो भगवान उसकी पूजा को पूर्ण रूप से स्वीकार कर लेते हैं।आरती का अर्थ होता है व्याकुल होकर भगवान को याद करना, उनका स्तवन करना। आरती, पूजा के अंत में धूप, दीप, कर्पूर से की जाती है।  हिंदू धर्म में अग्नि को शुद्ध माना गया है। पूजा के अंत में जलती हुई लौ को आराध्य देव के सामने एक विशेष विधि से घुमाया जाता है। इसमें इष्टदेवता की प्रसन्नता के लिए दीपक दिखाने के साथ ही उनका स्तवन और गुणगान किया जाता है। यह उपासक के हृदय में भक्ति दीप प्रज्वलित करने और ईश्वर का आशीर्वाद ग्रहण करने का सुलभ माध्यम है।

आरती का धार्मिक महत्व होने के साथ ही वैज्ञानिक महत्व भी है। आरती में प्रयोग होने वाली सामग्री जैसे रुई, घी, कपूर, फूल, चंदन आदि सबका मह्त्व होता है । रुई शुद्घ कपास होता है इसमें किसी प्रकार की मिलावट नहीं होती है। इसी प्रकार घी भी दूध का मूल तत्व होता है। कपूर और चंदन भी शुद्घ और सात्विक पदार्थ है।जब रुई के साथ घी और कपूर की बाती जलाई जाती है तो एक अद्भुत सुगंध वातावरण में फैल जाती है। इससे आस-पास के वातावरण में मौजूद नकारत्मक उर्जा भाग जाती है और सकारात्मक उर्जा का संचार होने लगता है।आरती में बजने वाले शंख और घड़ी-घंटी के स्वर के साथ जिस किसी देवता को ध्यान करके गायन किया जाता है उसके प्रति मन केन्द्रित होता है जिससे मन में चल रहे द्वंद का अंत होता है। हमारे शरीर में सोई आत्मा जागृत होती है जिससे मन और शरीर उर्जावान हो उठता है। और महसूस होता है कि ईश्वर की कृपा मिल रही है,इसलिए पूजा के बाद आरती की जाती है ।