इस पर्वत शिला पर पिंडदान करने से पूर्वजों को नहीं भोगनी पड़ती कष्टदायी योनी , जानिए इसका रहस्य:

हिंदू धर्म में पितृ पक्ष का अधिक महत्व माना जाता है। पितृ पक्ष को श्राद्ध पक्ष भी कहा जाता है, क्योंकि इस दौरान सभी लोग अपने पूर्वजों की मुक्ति के लिए पिंडदान कर उन्हें मृत्युलोक से मुक्ति दिलाते हैं। वहीं पूरे में पींडदान के कई स्थान हैं जिनमें से बिहार का गया इन सभी स्थानों में सबसे मुख्य माना जाता है। पटना से लगभग 104 किमी की दूरी पर स्थित गया एक प्राचीन धार्मिक नगरी है। धार्मिक मान्यता के अनुसार गया में श्राद्ध, पिंडदान आदि से मृत व्यक्ति की आत्मा को मृत्युलोक से मुक्ति मिल जाती है।

श्राद्धपक्ष में पितरों का श्राद्ध किया जाता है। इस समयकाल में पिंडदान के प्रमुख स्थान गया में श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रहती है। ऐसा कहा जाता है की पितृ पक्ष में पूर्वजों की आत्‍माएं स्वयं धरती पर आती हैं और अपने परिवार के लोगों को आस-पास होने का अहसास कराती है। वहीं गया के पास एक प्राचिन व रहस्यों से भरी के प्रेतशिला है। ऐसा माना जाता है की यहीं से पितृ श्राद्ध पक्ष में आते हैं और पिंड ग्रहण कर फिर यहीं से परलोक चले जाते हैं। तो आइए जानते हैं प्रेतशीला से जुड़ी कुछ रोचक बातें…

  1. गया के पास प्रेतशिला नाम का 876 फीट ऊंचा पर्वत है। इस रहस्यमय पर्वत प्रेतशिला के बारे में ऐसा कहा जाता है कि यहां पूर्वजों के श्राद्ध व पिंडदान का बहुत अधिक महत्व है। मान्‍यता यह है कि इस पर्वत पर पिंडदान करने से पूर्वज सीधे पिंड ग्रहण कर लेते हैं और उन्हें कष्टदायी योनियों में जन्म नहीं लेना पड़ता।
  1. प्रेतशिला के बारे में यह जाता है की ये लोक और परलोक के बीच की एक ऐसी कड़ी है जो दुनिया में रहस्य पैदा करती है। ऐसा बताया जाता है कि प्रेतशीला के पास के पत्थरों में एक विशेष प्रकार की दरारें और छेद हैं। जिनके माध्यम से पितृ आकर पिंडदान ग्रहण करते हैं तथा वहीं से वापस चले जाते हैं।
  2. सूरज डूबने के बाद ये आत्‍माएं विशेष प्रकार की ध्‍वनि, छाया या फिर किसी और प्रकार से अपने होने का अहसास कराती हैं। ये बातें यहां आस्‍था तथा विज्ञान से जुड़ी बातों पर आधारित हैं। न ही इन्‍हें झुठलाया जा सकता है तथा न ही इन्‍हें सर्वसत्‍य माना जा सकता है।
  3. इस प्रेतशिला के पास एक वेदी है जिस पर विष्णु भगवान के पैरों के चिह्न बने हुए हैं। इसके पीछे की एक प्रमुख कथा बताई गई है जिसके मुताबिक यहां गयासुर की पीठ पर बड़ी सी शिला रखकर भगवान विष्‍णु स्‍वयं खड़े हुए थे। ऐसा बताया जाता है कि गयासुर ने ही भगवान से यह वरदान पाया था कि यहां पर मृत्यु होने पर जीवों को नरक नहीं जाना पड़ेगा। गयासुर को प्राप्त वरदान के कारण से ही यहां पर श्राद्ध तथा पिंडदान करने से आत्मा को मुक्ति मिल जाती है।