इस कारण नही की जाती शिवलिंग की पूर्ण परिक्रमा..!! ज़रूर पढ़े..!!!

हिन्दू धर्म के पांचवे माह श्रावन यानी सावन में शिव पूजा का विशेष महत्व है। हर शिव भक्त अपनी श्रद्धा, आस्था और शक्ति से शिव पूजा कर अपनी कामनाओं को पूरा करना चाहता है। लेकिन शास्त्रों में शिव उपासना के लिए शिवलिंग पूजा की मर्यादाएं भी नियत है। इसकी जानकारी के अभाव में कुछ देव अपराध हो जाते हैं। शिवलिंग परिक्रमा भी शिव पूजा विधि का एक अंग है। यहां जानिए क्या है शिवलिंग परिक्रमा की मर्यादाएं –


भगवान शिव की पूजा के बाद शिवलिंग की परिक्रमा हमेशा बांई ओर से शुरू कर जलाधारी के आगे निकले हुए भाग यानी स्त्रोत (जहां से भगवान शिव को चढ़ाया जल बाहर निकलता है) तक जाकर फिर विपरीत दिशा में लौट दूसरे सिरे तक आकर परिक्रमा पूरी करें। इसे शिवलिंग की आधी परिक्रमा भी कहा जाता है।


जलाधारी या अरघा के स्त्रोत को लांघना नहीं चाहिए, क्योंकि माना जाता है कि उस स्थान पर ऊर्जा और शक्ति का भंडार होता है। अगर शिवलिंग की परिक्रमा के दौरान जलाधारी को लांघा जाए, तो लांघते वक्त पैर फैलने से वीर्य या रज और इनसे जुड़ी शारीरिक क्रियाओं पर इस शक्तिशाली ऊर्जा का बुरा असर हो सकता है। इसलिए जब भी शिवलिंग पूजा करें, इस बात का ध्यान रखकर अनजाने में होने वाले इस देव दोष से बचें।