मंदिर से आते समय ये एक भूल देती है पूजा का उल्टा फल!! जानिये क्या है वो एक गलती !!

मंदिर से आते समय ये एक भूल देती है पूजा का उल्टा फल!! जानिये क्या है वो एक गलती !!

मंदिर में भगवान के दर्शन के बाद परिक्रमा करना जरूरी होता है। परिक्रमा करना यह दर्शाता है कि एक भक्त का अपनी भगवान के प्रति समर्पण होता है। और इसी चीज़ का शास्त्रों में भी उल्लेख किया गया है ।अगर आप देखेंगे तो ब्रह्मांड में भी ग्रह उपग्रह परिक्रमा करते रहते हैं मंदिर में भी परिक्रमा लगाने के कुछ नियम बनाए गए हैं जिनका पालन करने से हमें पूजा का पूरा फल मिलता है और अगर हम इन का उल्लंघन करते हैं तो हमारी पूजा हमें उल्टा ही फल देती है।

तो आईए जानते हैं मंदिर में दर्शन के बाद कौन सी ऐसी ऐसी गलतियां हैं जो हमें नहीं करनी चाहिए

1.परिक्रमा के दौरान मनुष्य के लिए सबसे ज्यादा जरूरी है कि  मनुश्य का मन शांत हो उसका भाव शुद्ध हो इस समय सांसारिक विषयों की चर्चा नहीं करनी चाहिए दिव्य परिक्रमा लगाए तो किसी भी व्यक्ति या अपने दोस्त परिवार के साथ दैनिक विषयों पर कोई भी चर्चा ना करें।

2. परिक्रमा के दौरान अपने किसी प्रिय भगवान या फिर प्रिय मंत्र का जाप करना अति फलदाई माना गया है ।आते समय ना तो बहुत धीरे चलें यही दौड़ लगाएं अर्थात सामान्य गति से परिक्रमा लगाएं।

3. जब भी परिक्रमा लगा रहे हो  तो ध्यान रखें कि पीछे मुड़कर ना जाए। जब परिक्रमा पूर्ण कर लें तो भगवान को पीठ ना दिखाए ऐसा करना अशुभ माना गया है यह भी ध्यान रखना है परिक्रमा धर्म करते समय बीच-बीच में रुकना नहीं चाहिए।

4. इसके अलावा भगवान गणेश की तीन परिक्रमा करने का विधान है। भगवान शिव की आधी  परिक्रमा और भगवान विष्णु जी की और उनसे जुड़े हुए सभी अवतारों की चार परिक्रमा। हनुमान जी की तीन परिक्रमा, शनि देव और पीपल के पेड़ की सात परिक्रमा करने का विधान है।

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