जानिये धरती पर स्थित स्वर्ग लोक के वृक्ष के बारे में चमत्कारिक बातें……

भागवत में एक वृक्ष के बारे में बताया जाता है जिसका नाम है पारिजात वृक्ष यह एक ऐसा वृक्ष है जिसे स्वर्ग लोक से लाकर मृत्यु लोक में लगाया गया है वो भी एक शिव भक्त की मनोकामना पूरी करने के लिए | आइये जानते है इस वृक्ष के बारे में , यह वृक्ष जिस स्थान पर है वह स्थान उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जनपद मे सफदरगंज के पास कोटवा आश्रम के निकट है ।

कहा जाता है महाभारत काल मे अज्ञातवास के दौरान एक बार कुन्ती की इच्छा शिव जी को स्वर्ण पुष्प भेंट करने की हुई पर अज्ञातवास मे कैसे संभव हो पाता । इस पर अर्जुन ने स्वर्ग लोक जा कर पारिजात वृक्ष की एक डाल ला कर कुँए मे डाल दिया जिससे यह वृक्ष बन गया । इसी के सुनहरे फूल को कुन्ती ने शिव को अर्पित किया ।

बताया जाता है यह वही पारिजात वृक्ष है जो मई से अक्टूबर तक छ: मास हराभरा रहता है और पुष्प देता है । शेष छ: माह सूख जाता है । इतना प्राचीन होने के बावजूद कोई टहनी गिरती नही और यह वृक्ष हाथी की तरह दिखता है ।

आमतौर पर पारिजात वृक्ष 10 फीट  से 25 फीट तक ऊंचे होता है, पर  किंटूर में स्तिथ पारिजात वृक्ष लगभग 45 फीट ऊंचा और 50 फीट मोटा है। इस पारिजात वृक्ष कि सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह अपनी तरह का  इकलौता पारिजात वृक्ष है, क्योकि इस पारिजात वृक्ष पर बीज नहीं लगते है तथा इस पारिजात वृक्ष कि कलम बोने से भी दूसरा वृक्ष तैयार नहीं होता है। पारिजात वृक्ष  पर जून के आस पास बेहद खूबसूरत सफ़ेद रंग के फूल खिलते है। पारिजात के फूल केवल रात कि खिलते है और सुबह होते ही मुरझा जाते है।  इन फूलों का लक्ष्मी पूजन में विशेष महत्तव है। पर एक बात ध्यान रहे कि पारिजात वृक्ष के वे ही फूल पूजा में काम लिए जाते है जो वृक्ष से टूट कर गिर जाते है, वृक्ष से फूल तोड़ने कि मनाही है।