जानिये कहाँ और क्यों होती है पांचों पांडव कि पूजा..!!!

अनोखा गांव जहाँ होती है पांचों पांडव कि पूजा..!!!

पुजारी कांकेर गांव
पुजारी कांकेर गांव

आज हम आपको छत्तीसगढ के बीजापुर जिले के पुजारी कांकेर गांव के बारे में बता रहें है जहाँ आज भी लोग पांचों पांडवों को श्रद्धा से पूजते हैं। और तो और ग्रामीणों ने पांचों पांडवों के लिए अलग- अलग पुजारी भी नियुक्त किए हैं। ग्रामीणों ने गांव की सरहद पर धर्मराज (युधिष्ठिर) मंदिर भी बना रखा है, जहां हर दो साल में एक बार मेला लगता है।

मान्यता के अनुसार कौरवों के हाथों अपना सब कुछ गंवा देने के बाद पांडव जब अज्ञातवास पर निकले तो उस दौरान उन्होंने अपना कुछ समय दंडकारण्य में गुजारा था। इसमें से एक इलाका पुजारी कांकेर का भी था।जब पांडव यहां पहुंचे थे, तब उन्होंने दुर्गम पहाड़ पर स्थित गुफा से प्रवेश किया था और यहीं आश्रय लिया था इसलिए बाद में इस पहाड़ का नाम दुर्गम पहाड़ के स्थान पर पांडव पर्वत रखा गया। उनके मुताबिक पांडव इस पर्वत से

पुजारी कांकेर गांव
पुजारी कांकेर गांव

होकर गुजरने वाली सुरंग से होकर भोपालपटनम के पास स्थित सकलनारायण गुफा से निकले थे, जहां वर्तमान में श्रीकृष्ण की मूर्ति है। ग्रामीणों का कहना है कि पूजा पाठ और पुजारियों का गांव होने के कारण ही इस गांव का नाम पुजारी कांकेर रखा गया है।