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आपकी भूख है महाकाल का एक अवतार जानिये कैसे ……

भूख का स्वरूप है गृहपत्यावतार भगवान शंकर का सातवां अवतार है गृहपति। यह अवतार हमें संदेश देता है कि हम जो भी कार्य करें उसके केंद्र में भगवान
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जानिये जब ब्रह्मा ने महाकाल का किया अपमान तो किसका जन्म हुआ…..!!!

कैसे हुआ काल भैरव का जन्म ‘शिवपुराण’ के अनुसार मार्गशीर्ष मास के कृष्णपक्ष की अष्टमी को मध्यान्ह में भगवान शंकर के अंश से भैरव की उत्पत्ति हुई थी,
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महाकाल के अंश काल भैरव के बारे में वो सबकुछ जो आपको अभी तक नहीं पता था …

भगवान् काल भैरव शिव, महारुद्र जी के 10 वे अवतार है और 11 वे रूद्र, हनुमानजी हैं और ये दोनों ही, कलयुग में प्रत्यक्ष तथा साक्षात्कार, संजीव देवता
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जानिए क्या सम्बन्ध है विष्णु जी के सुदर्शन चक्र का महाकाल से ….!!!

भगवान विष्णु के हर चित्र व मूर्ति में उन्हें सुदर्शन चक्र धारण किए दिखाया जाता है। यह सुदर्शन चक्र भगवान शंकर ने ही जगत कल्याण के लिए भगवान
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जानिये कौन सी माता दिन में गुजरात जाती है और रात्रि में आ जाती है मध्य प्रदेश में

उज्जैन स्थित भव्य श्री हरसिद्धि मंदिर भारत के प्राचीन स्थानों में से एक है जो कि माता सती के ५१ शक्तिपीठों में १३वा शक्तिपीठ है । पौराणिक कथाओं
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भक्ति की गहराई सिखाती एक अद्भुत कथा- जय महाकाल !!!!

सिंहकेतु पांचाल देश का एक राजा था  जो की बहुत बड़ा शिवभक्त था।   शिव आराधना और शिकार उसके दो चीजें प्यारी थीं,  वह शिकार खेलने रोज जंगल
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जानिये कहाँ बरगद पेड़ की शाखाओं ने लोहे के चादर को भी फाड़ दिया…!!!!!

सिद्धवट घाट उज्जैन का सिध्दवट प्रयाग के अक्षयवट, वृन्दावन के वंशीवट तथा नासिक के पंचवट के समान अपनी पवित्रता के लिए प्रसिध्द है। इसे शक्तिभेद तीर्थ के नाम
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महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग की कहानी जिसे पढ़कर मन प्रसन्न हो जाएगा……

उज्जैन नगरी में स्तिथ महाकाल ज्योतिर्लिंग, शिव जी का तीसरा ज्योतिर्लिंग कहलाता है।  यह एक मात्र ज्योतिर्लिंग है जो दक्षिणमुखी है। इस ज्योतिर्लिंग से सम्बंधित कहानि पुराणों में वर्णित
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महाकाल करेंगे सफल ये आपका नव वर्ष 2017, आपको करना है सिर्फ इतना…..

महाकाल स्तोत्रं इस स्तोत्र को भगवान् महाकाल ने खुद भैरवी को बताया था. इसकी महिमा का जितना वर्णन किया जाये कम है. इसमें भगवान् महाकाल के विभिन्न नामों
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इस गणेश मंदिर की स्थापना स्वयं श्री राम ने की थी ……..

श्री स्थिरमन गणेश  एक अति प्राचीन गणपति मंदिर जो कि उज्जैन में स्थित है । इस मंदिर एवं गणपतिकी विशे षता यह है कि  वे न तो दूर्वा और न ही मोदक और लडडू से प्रसन्न होते हैं उनको गुड़  की एक डली सेप्रसन्न कि या जाता है । गुड़ के साथ नारियल अर्पित करने से गणपति प्रसन्न हो जाते हैं और भक्तों की झोलीभर  देते हैं, ह र लेते हैं भक्तों का हर दुःख और साथ ही मिलती है मन को बहुत शान्ति । इस मंदिर में सुबहगणेश जी का सिंदू री श्रंगार कर चांदी के वक्र से सजाया जाता है । यहां सुबह – शाम आरती होती है जिसमें शंखों एवं घंटों की ध्वनि मन को शांत कर  देती है । इतिहास में वर्णनमिलता है कि श्री राम जब सीता और लक्ष्मण के साथ तरपन के लिए उज्जैन आये थे तो उनका मन बहुतअस्थिर हो गया तथा भगवान श्री राम  ने श्रीस्थिर गणेश की स्थापना कर पूजा की तब श्री राम का मन स्थिर हुआ। कहा जाता है कि राजा विक्रमादित्य का जब मन अस्थिर हुआ तो गलत फैसले होने पर वे श्रीस्थिर गणेशमंदिर आकर उन्होंने गणपति की आराधना की तब कहीं उनका मन स्थिर हुआ ऐसी मान्यता है कि मंदिर की पिछली दीवार पर उल्टा स्वास्तिक बना कर मान्यता मानने से मन की कामनापू र्ण होती है । मान्यता पूरी होने पर चढ़ाना होगा गुड़ एवं नारियल । मंदिर परिसर में एक बड़ा शमी का पेड़ है जिसकी पूजा आपकी सभी इच्छाओं को पूरा करती है । उज्जैन आयें तो श्रीस्थिरमन गणेश मंदिर जरूर दर्शनकरें ।
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