पद्मिनी एकादशी: जानिए कब है पद्मिनी एकादशी, पूजा का मुहूर्त, पारण समय और महत्व!!

पद्मिनी एकादशी 2020 :  हिन्दी पंचांग के मुताबिक , पद्मिनी एकादशी का व्रत अधिकमास या मलमास के समय में आता है । ऐसे में अधिक आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को पद्मिनी एकादशी का व्रत रखा जाता है । पद्मिनी एकादशी को अधिकमास एकादशी भी कहते है । इस साल पद्मिनी एकादशी का व्रत 27 सितंबर दिन रविवार को है । सभी एकादशी के तरह पद्मिनी एकादशी में भी विष्णु भगवान की पूजा की जाती है । भगवान श्रीकृष्ण जी ने धर्मराज युधिष्ठिर से पद्मिनी एकादशी के महत्व के बारे में बताया था । तो आइए जानते हैं कि इस वर्ष पद्मिनी एकादशी व्रत और पूजा का मुहूर्त क्या है, पारण का समय क्या है और इसका महत्व क्या है।

जानिए पद्मिनी एकादशी का महत्व :
पद्मिनी एकादशी के व्रत को बहुत ही प्रभावशाली माना जाता है क्योंकि यह व्रत अधिक मास में किया जाता है इसलिए इससे मिलने वाला फल भी अधिक होता है। अधिक मास विष्णु भगवान की आराधना का महीना है और एकादशी तिथि भगवान विष्णु को अति प्रिय है। मान्यता यह है कि जो लोग भी भगवान विष्णु की असीम कृपा प्राप्त करना चाहते हैं उन्हें पद्मिनी एकादशी का व्रत जरूर करना चाहिए।

जानिए पद्मिनी एकादशी का मुहूर्त :

अधिक आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि का प्रारंभ 26 सितंबर दिन शनिवार को सुबह 06 बजकर 29 मिनट पर हो रहा है, जो 27 सितंबर दिन रविवार को सुबह 7 बजकर 16 मिनट तक है। ऐसे में आपको पद्मिनी एकादशी का व्रत 27 सितंबर को रखना उचित होगा ।

जानिए पद्मिनी एकादश पारण का समय :

पद्मिनी एकादशी का व्रत रखने वाले व्यक्ति को अगले दिन सुबह सूर्योदय होने के बाद पारण करके व्रत को पूरा करना चाहिए । पद्मिनी एकादशी व्रत के पारण का समय 28 सितंबर दिन सोमवार को सुबह 06 बजकर 19 मिनट से सुबह 08 बजकर 28 मिनट के बीच रहेगा । आपको इसके मध्य पारण कर लेना है । द्वादशी तिथि के समापन का समय 08 बजकर 28 मिनट का है। एकादशी का पारण द्वादशी तिथि के खत्म होने से पूर्व कर लेना होगा।