आज पढ़े ॐकारेश्वर ज्योतिर्लिंग की कथा..!!! हर हर महादेव..!!!

ज्योतिर्लिंग कथाए

ॐकारेश्वर ज्योतिर्लिंग

एक बार विन्ध्यपर्वत ने भगवान शिव की कई माहों तक कठिन तपस्या की उनकी इस तपस्या से प्रसन्न होकर शंकर जी ने उन्हें साक्षात दर्शन दिये. और विन्ध्य पर्वत से अपनी इच्छा प्रकट करने के लिए कहा. इस अवसर पर अनेक ऋषि और देव भी उपस्थित थे़. विन्ध्यपर्वत की इच्छा के अनुसार भगवान शिव ने ज्योतिर्लिंग के दो भाग किए. एक का नाम ओंकारेश्वर रखा तथा दूसरा ममलेश्वर रखा.

ओंकारेश्वर में ज्योतिर्लिंग के दो रुपों की पूजा की जाती है. ओंकारेश्वार ज्योतिर्लिंग से संबन्धित अन्य कथा के अनुसार भगवान के महान भक्त अम्बरीष और मुचुकुन्द के पिता सूर्यवंशी राजा मान्धाता ने इस स्थान पर कठोर तपस्या करके भगवान शंकर को प्रसन्न किया था. उस महान पुरुष मान्धाता के नाम पर ही इस पर्वत का नाम मान्धाता पर्वत हो गया.