दुनिया का एकमात्र पंच मुखी शिवलिंग जिससे मिलती है समस्त 12 ज्योतिर्लिंगों को शक्तियां!!

दुनिया का एकमात्र पंच मुखी शिवलिंग जिससे मिलती है भारत के समस्त 12 ज्योतिर्लिंगों को शक्तियां!!

मध्यप्रदेश के जिले खंडवा के ओंकारेश्वर में जो शिवलिंग है, वह 12 ज्योतिर्लिंगों में सबसे अनोखा माना जाता है। इसलिए यदि सभी तीर्थ करने के बाद ओंकार के दर्शन नहीं किए तो उन्हे तीर्थ करने का फल नहीं मिलता।इस मंदिर में सबसे विशेष बात यह है कि यह 12 ज्योतिर्लिंगों  मे एक मात्र शिवलिंग है जो पंच मुखी है।

पुराणों मे माना जाता है की औंकार शिवलिंग निराकार है और इसके आधार पर इस शिवलिंग का कोइ आकार नहीं है । वर्तमान मे इन्हे प्रत्यक्ष देखने पर भी इनके पाँच मुख दिखाई देते है।इस मंदिर में एक और सबसे विशेष बात यह है कि सभी मंदिरों में शिवलिंग का गर्भगृह शिखर के नीचे रहते हैं लेकिन ओंकारेश्वर में ऐसा नहीं है ।नर्मदा किनारे बसा ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग एक मात्र ऐसा स्थान है जहां शिवलिंग मंदिर की शिखर के नीचे नहीं है। और यही एक मात्र शिवलिंग है जिससे समस्त 12 ज्योतिर्लिंगों को शक्तियां मिलती है।

दुनियां में जितने भी मुख्य मंदिर हैं, उनमें से केवल ओंकार शिव ही मंदिर के दक्षिण में विराजित हैं। मंदिर बहुत पुराना है, इसलिए इसके तथ्यात्मक प्रमाण नहीं हैं। पुराणों के आधार पर इसकी कई कथाएं हैं जो नर्मदा से जुड़ी हुई हैं।साधु संत व पंडि़तों का कहना है कि ओंकारेश्वर का महत्व सभी 12 ज्योतिर्लिंगों में सबसे अधिक मना जाता है। सभी तीर्थ करने के बाद जब तक ओंकार शिव के दर्शन और अन्य तीर्थों के जल से स्नान न करवाओ तब तक तीर्थ करने का पुण्य नहीं मिलता है।

कौरव-पांडवों ने बनवाया था मंदिर

स्कंद पुराण के रेवा खंड में ओंकारेश्वर मंदिर का वर्णन है कि यहां पांडव काल के समय यहां मंदिर नहीं था। इस दौरान कौरवों ने मंदिर का निर्माण पूर्व की तरफ द्वार करके कराया था, लेकिन पांडवों ने इसे घुमाकर पश्चिम की तरफ कर था, यह निर्माण एक रात में ही किया था। ऐसा भी माना जाता है कि मंदिर को घुमाने के दौरान शिवलिंग अपने स्थान से नहीं हिले वे वहीं रहे लेकिन मंदिर घूम गया।