शिवरात्रि से जुड़ा है महादेव का नाम ” नीलकंठ”, रोचक कथा..!! ज़रूर पढ़े

महाशिवरात्रि के संदर्भ में बहुत दिलचस्प कथाएं पुराने हिन्दु ग्रंथों में दर्ज हैं, जो महाशिवरात्रि के महत्व को दर्शाती हैं। पुराणों के अनुसार सागर मंथन के दौरान निकलने वाले ज़हर के प्याला को पीने के लिए जब कोर्इ देवी-देवता तैयार नहीं थे। तब सभी भगवान शिव के द्वार पर पहुंचे एवं शिव भगवान को निवेदन किया, जिसके बाद शिव भगवान विष पीने के लिए तैयार हो गए। कहते हैं कि विष पीने के बाद शिव ने विष को अपने गले से नीचे नही उतारा एवं विष ने अपने प्रभाव से उनके गले को नीला कर दिया,जिसके बाद उनको नीलकंठ नाम से भी पुकारा जाने लगा। महाशिवरात्रि पर्व इसलिए भी मनाया जाता है कि शिव ने पूरा ज़हर पीकर पूरे विश्व की रक्षा की।

इस तरह एक दंत कथा ये भी है कि एक शिकारी शिकार के लिए जंगल में गया। शिकारी जंगल में बिलवा पत्र के पेड़ पर चढ़कर बैठ गया, एवं शिकार का इंतज़ार करने लगे। उसको ख़बर नहीं थी कि पेड़ के नीचे शिवलिंग स्थापित है, एवं न ही उसको महाशिवरात्रि का ध्यान था। शिकारी पत्ते तोड़ तोड़ शिवलिंग पर गिराता रहा। दिन की पहली तिमाही के दौरान शिकारी ने एक हिरण को पानी पीने के लिए आते देखा, उसने शिकार करने की कोशिश की, तो हिरण ने अपने बच्चों का वास्ता दिया, इस पर शिकारी को दया आर्इ, उसने हिरण को जाने दिया एवं उसके बाद हिरण का बच्चा आया, शिकारी ने शिकार करने का मन छोड़ दिया।

पेड़ पर बैठा शिकारी खाली पेट शिवलिंग पर तोड़ तोड़ पत्ते गिराता रहा। जब पूरा दिन गुज़र गया तो भगवान शिव स्वयं उस के सामने प्रकट हुए एवं उसको मोक्ष की प्राप्ति हो गयी। इस तरह अगर आप अनजाने में भी महाशिवरात्रि के दिन उपवास रखते हैं तो इसके आप को बहुत लाभ मिलते हैं।

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