इस शारदीय नवरात्र जानिए नवरात्री में क्यों रात में की जानी चाहिए माँ दुर्गा की पूजा…!!!

हमारे भारत में नवरात्रि एक महत्वपूर्ण प्रमुख त्योहार है जिसे पूरे देश में बहुत ज्यादा उल्लास और उत्साह के साथ मनाया जाता है। शक्ति की उपासना का पर्व शारदीय नवरात्र प्रतिपदा से नवमी तक निश्चित नौ तिथि, नौ नक्षत्र, नौ शक्तियों की नवधा भक्ति के साथ सनातन काल से मनाया जा रहा है। इस साल शारदीय नवरात्रि का प्रारंभ 21 सितंबर से हो रहा है। सर्वप्रथम श्रीरामचंद्रजी ने इस शारदीय नवरात्रि पूजा का प्रारंभ समुद्र तट पर किया था और

शक्ति की उपासना का पर्व शारदीय नवरात्र
शक्ति की उपासना का पर्व शारदीय नवरात्र

उसके बाद दसवें दिन लंका विजय के लिए प्रस्थान किया और विजय प्राप्त की। तब से असत्य, अधर्म पर सत्य, धर्म की जीत का पर्व दशहरा मनाया जाने लगा। आदिशक्ति के हर रूप की नवरात्र के नौ दिनों में क्रमशः अलग-अलग पूजा की जाती है। लोग अपने घर में पहले से पूजा की तैयारी करते हैं। सभी चाहते हैं कि शक्ति स्वरूपा माता दुर्गा की पूजा से विशेष कृपा उनपर बनी रहे।

नवरात्रि का अर्थ होता है नौ रातों की पूजा। इसलिए नवरात्री में रात की पूजा का बहुत महत्व होता है । माना जाता है तंत्र विद्या में रात्रि पूजन का विशेष महत्व है। इतना ही नहीं देखा गया है अधिकांश पर्व और त्यौहार रात्रि में मनाए जाते हैं। इसलिए नवरात्रि में नौ दिनों तक रात में मां दुर्गा की पूजा और उपासना की जानी चाहिए।

 नवरात्री में रात की पूजा
नवरात्री में रात की पूजा

बता दें नवरात्रि में लगातार नौ रत्रियों में पूजन से विशेष अध्यात्मिक शक्ति प्राप्त होती है। भारतीय परंपरा में पूजन और ध्यान के लिए रात का समय सबसे उत्तम मन गया है। क्योंकि आध्यात्म के चिंतन के लिए शांत वातावरण को अनिवार्य मन गया है।

रात्रि काल में शांति रहती है इसलिए ऐसे शांत वातावरण में मां दुर्गा की पूजा, उपासना और मंत्र जाप करने से विशेष लाभ होता है। साथ ही मां दुर्गा की विशेष कृपा प्राप्त होती है और भक्तों की मनोकामना पूरी होती है।

 

॥ जय माता दी ॥

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