जरूर पढ़े; हमारी पूजा-पाठ के अति महत्वपूर्ण हिस्से ‘नारियल’ का कैसे हुआ जन्म..!!!

पूजा-पाठ में अति महत्वपूर्ण नारियल
पूजा-पाठ में अति महत्वपूर्ण नारियल

क्या आप जानते है हमारी पूजा-पाठ में अति महत्वपूर्ण रहने वाला नारियल कैसे अस्तित्व में आया।इसके पीछे एक पौराणिक कथा है  प्राचीन काल के राजा सत्यव्रत की एक ही इच्छा थी कि किसी भी तरह  स्वर्गलोक जा सके। लेकिन स्वर्ग कैसे जाया जाये ये सत्यव्रत नहीं जानते थे।

जब एक बार राजा के क्षेत्र में सुखा पड़ा तो उन्होंने सभी पीड़ित परिवारों कि सहायता की इन्ही में से एक परिवार ऋषि विश्वामित्र का भी था जब ऋषि

विश्वामित्र वापस लौटे तो वे राजा से मिलने उनके दरवार पहुंचे और उनका धन्यवाद किया। ऋषि विश्वामित्र उन्हें वरदान मांगने को कहा, तब राजा ने वरदान में माँगा कि वे स्वर्गलोक जाना चाहते है और विश्वामित्र अपनी शक्तियों से उन्हें स्वर्ग पहुँच दे। विश्वामित्र ने राजा की बात मान ली और एक ऐसा मार्ग तैयार किया जो सीधा स्वर्गलोक को जाता था। राजा सत्यव्रत खुश हो गए और उस मार्ग के जरिये स्वर्गलोक के पास पहुंचे ही थे कि इंद्र ने उन्हें वापस नीचे धकेल दिया। राजा सीधे धरती पर गिरे और विश्वामित्र के पास पहुंचे और सारी घटना का वर्णन करने लगे।

देवताओं के इस प्रकार व्यवहार से विश्वामित्र क्रोधित हो उठे और सीधे देवताओं से बात करने पहुँच गए, फिर आपसी सहमति से एक हल निकाला गया इसके मुताबिक राजा सत्यव्रत के लिए एक अलग से स्वर्गलोक के निर्माण का आदेश दिया गया।

विश्वामित्र ने इस स्वर्गलोक के ठीक नीचे एक खंबे का निर्माण किया जिसने उसे सहारा दिया।

ऐसा माना जाता है कि यही खम्बा कई समय बीतने के बाद एक पेड़ के मोटे तने के रूप में बदल गया और राजा सत्यव्रत का सिर एक फल बन गया। इस

पेड़ को नारियल का पेड़ और राजा के सिर को नारियल कहा जाने लगा।

बीएस इस तरह नारियल अस्तित्व में आया,आज भी नारियल का पेड़ काफी ऊंचाई पर लगता है।

 

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