जानिये नंदी के वो गुण जिससे उसे है महादेव की शरण प्राप्त…..

जहां भी भगवान शिव की पूजा होती है या जहां भी शिव की महिमा की बात होती है वहां नंदी का ज़िक्र आता ही है। अकसर देखा जाता है कि शिव की मूर्ति के सामने या उनके मंदिर के बाहर शिव के वाहन नंदी की मूर्ति स्थापित होती है। आइए जानते हैं भगवान शिव के वाहन नंदी से सम्बंधित एक पौराणिक कहानी जिससे हमें पता चलेगा की नंदी क्यों और कैसे महादेव की सवारी बने साथ ही यह जानेंगे की अध्यात्मिक रूप से नंदी के किन गुणों के कारण नंदी महादेव के साथ है |

शिलाद मुनि के ब्रह्मचारी हो जाने के कारण वंश समाप्त होता देख उनके पितरों ने अपनी चिंता उनसे व्यक्त की। मुनि योग और तप आदि में व्यस्त रहने के कारण गृहस्थाश्रम नहीं अपनाना चाहते थे। शिलाद मुनि ने संतान की कामना हेतु भगवान् शिव की आराधना की | भगवान शंकर ने शिलाद मुनि के कठोर तपस्या से प्रसन्न होकर स्वयं शिलाद के पुत्र रूप में प्रकट होने का वरदान दिया। कुछ समय बाद भूमि जोतते समय शिलाद को एक बालक मिला। शिलाद ने उसका नाम नंदी रखा। उसको बड़ा होते देख भगवान शंकर ने मित्र और वरुण नाम के दो मुनि शिलाद के आश्रम में भेजे जिन्होंने नंदी को देखकर भविष्यवाणी की कि नंदी अल्पायु है। नंदी को जब यह ज्ञात हुआ तो वह महादेव की आराधना से मृत्यु को जीतने के लिए वन में चला गया। वन में उसने शिव का ध्यान आरंभ किया।

भगवान शिव नंदी के तप से प्रसन्न हुए व दर्शन वरदान दिया जिसके बाद नंदी मृत्यु से भय मुक्त, अजर-अमर और अदु:खी हो गया। इसके साथ ही भगवान शंकर ने नंदी को वरदान दिया कि जहां पर उनका निवास होगा वहां नंदी का भी निवास होगा। तभी से हर शिव मंदिर में शिवजी के सामने नंदी की स्थापना की जाती है।

नंदी के अध्यात्मिक गुण

नंदी अनंत प्रतीक्षा का प्रतीक है ,वह कुदरती तौर पर ध्यानमग्न हो सकता है। नंदी शिव का सबसे करीबी साथी है क्योंकि उसमें ग्रहणशीलता का गुण है। किसी मंदिर में जाने के लिए आपके अंदर नंदी का गुण होना चाहिए। ताकि आप बस बैठ सकें। इस गुण के होने का मतलब है – आप स्वर्ग जाने की कोशिश नहीं करेंगे, आप यह या वह पाने की कोशिश नहीं करेंगे – आप बस वहां बैठेंगे। लोगों को हमेशा से यह गलतफहमी रही है कि ध्यान किसी तरह की क्रिया है। नहीं – यह एक गुण है। नंदी का गुण यही है, वह बस सजग होकर बैठा रहता है। यह बहुत अहम चीज है – वह सजग है, सुस्त नहीं है। वह आलसी की तरह नहीं बैठा है। वह पूरी तरह सक्रिय, पूरी सजगता से, जीवन से भरपूर बैठा है, ध्यान यही है। वह बस बैठा रहकर हर किसी को याद दिलाता है, ‘तुम्हें मेरी तरह बैठना चाहिए।’