क्यो होती है नाग की पूजा?? क्यो है यह दुनिया का सबसे रहस्यमय जीव???

नाग पूजा क्यों?
सावन के महीने में शुक्ल पक्ष की पंचमी को नागपंचमी का पर्व मनाया जाता है। विदेशी धर्मों में नाग को शैतान माना गया है। हालांकि नाग उतना बुरा नहीं है जितना कि आज का आदमी है। भारतीय संस्कृति की यह विशेषता है कि इसमें जीवन को पोषित करने वाले जीवनोपयोगी पशु-पक्षी, पेड़- पौधे एवं वनस्पति सभी को आदर दिया गया है।

जहां एक ओर गाय, पीपल, बरगद तथा तुलसी आदि की पूजा होती है, वहीं अपने एक ही दंश से मनुष्य की जीवनलीला समाप्त करने वाले नाग की पूजा भी की जाती है। इस विषधर जीव को शास्त्रों में देवतुल्य और रहस्यमय प्राणी माना गया है, लेकिन यह ईश्वर नहीं है। इसकी विशेषता यह है कि यह मानव से अधिक बुद्धिमान और चीजों को होशपूर्वक देखने में सक्षम है। इसकी चेतना पर शोध किए जाने की आवश्यकता है।

एक ओर जहां भगवान विष्णु शेषनाग की शैया पर शयन करते हैं तो दूसरी ओर भगवान शिव नाग को गले में डाले रहते हैं। नागों एवं सर्पों का सृष्टि के विकास से बहुत पुराना संबंध रहा है। देवों और दानवों द्वारा किए गए सागर मंथन के समय सुमेरु पर्वत को मथनी तथा वासुकि नाग को रस्सी बनाया गया था। वर्तमान में नाग पूजा के नाम पर इस बेचारे जीव का अस्तित्व संकट में है।