कैसे नाग देवता की पूजा करने से होगा परिवार का संकट दूर :

युगो से चली आरही है नागपंचमी के दिन नाग देवता की पूजा श्रद्धा आराधना | यह देखा जाता है की भगवन शिव के गले में नाग हमेशा होता है, उस नाग का नाम है वासुकि यह नागो का राजा है| भगवान् शिव को इनकी भक्ति ने प्रसन्न कर दिया था तथा शिवभगवान ने इनको नागो का राजा बना दिया| सर्वप्रथम नाग जाती के लोगो ने शिवलिंग की पूजा की थी | माना जाता है की नाग देवता की पूजा करने से मनुष्य को आर्थिक एवं स्वास्थय लाभ होता है, व्यर्थ में घभराना ख़त्म होता है,सुख एवं समृद्धि की प्राप्ति होती है |

नाग पंचमी का शुभ मुहरत :-
श्रावण शुक्ल पंचमी के दिन नाग देवता के लिए व्रत एवं पूजन किये जाते है | पहले एवं दूसरे दिन तीन मुहरत से काम हो तो व्रत चतुर्थी पर नहीं किया जाता परन्तु तीन मुहरत से अधिक हो तो व्रत चतुर्थी की शाम से रखना होता है |

यह सत्य है की परिवार में तरह तरह के संकट आते है | संकट को दूर करने हेतु इस प्रकार करे नाग देवता की पूजा :-
अपने घर आँगन में करे नागदेवता की पूजा| व्रत रखते हुए पूजा के लाभ अधिक है | नाग देवता को प्रारम्भ में चन्दन हल्दी चावल का
अर्घ चढ़ाये तथा नाग देवता से प्रार्थना करे – है देव ! मेरे जीवन में आयी हुई बाधा को दूर करे एवं कार्यो में वृद्धि लाये | नागदेवता को सुगंध अति प्रिय है इसके अतिरिक्त मालपुए एवं लड्डू का भोग लगाए अंत में नाग देवता को दूध अवश्य अर्पित करे| जिस मंदिर में भगवन शिव के गले में नाग न हो वह नाग की प्रतिष्ठा पूजा ,विधान एवं मंत्रो के साथ संपन्न कराये तथा ॐ नाग देवताये नमः का जाप करे इससे कार्यो में रुकावट नहीं आएगी एवं प्रगति बढ़ेगी|