भगवान् से बिलकुल न मांगे ये चीज़ वरना बर्बाद होने से खुद भगवान् भी नहीं बचा पाएंगे !!

भगवान् से बिलकुल न मांगे ये चीज़ वरना बर्बाद होने से खुद भगवान् भी नहीं बचा पाएंगे !!

मांगने की प्रवृत्ति हर व्यक्ति में होती है हर व्यक्ति किसी न किसी से कुछ ना कुछ अवश्य ही मांगता है वैसे ही भगवान से भी कई बार हम लोग कुछ ऐसी चीजें मांगने लगते हैं जिससे भगवान स्वयं नाराज हो जाते हैं और आपको बर्बाद कर देते हैं। एक छोटी सी कहानी से इसेहम समझाने का प्रयास करेंगे।

एक नगर में दो मित्र रहते थे इनमें से एक दृष्टिहीन था और दूसरा मित्र लग रहा था एक जो देखने में असमर्थ था और दूसरा चलने फिरने में लाचार था। इसी वजह से दोनों एक दूसरे की सहायता से नगर में घूम घूम कर भिक्षा मांगा करते थे। और इसी तरह से दोनों का जीवनयापन होता था कहने को तो दोनों पर भी बहुत गहरी मित्रता थी पर उन्हें कभी कबार विवाद भी हो जाता था। हालांकि दोनों को ही एक दूसरे की जरूरत थी जिसकी वजह से वह बहुत जल्द ही अपना विवाद सुलझा लेते थे और आपस में सुलह भी कर लेते थे। लेकिन एक दिन दोनोंके बीच विवाद इतना बढ़ गया की नौबत हाथापाई तक पहुंच गई दोनों अपने हाथों से पीटकर और असहाय इधर-उधर पड़े हुए थे यह देख कर परमात्मा को बड़ी पीड़ा हुई उन्होंने सोचा कि अगर लंगड़े व्यक्ति को प्यार और दृष्टिहीन को आंखें दे दी जाए तो यह दोनों ही सुखी हो जाएंगे।

यह सोचकर परमात्मा सबसे पहले दृष्टिहीन के समक्ष प्रकट हुए उन्हें लगता था कि वह अपने लिए अपनी आंखें ही मांगेगा कि तुझे ही परमात्मा ने उनसे पूछा वत्स कोई वर मांगो दृष्टिहीन व्यक्ति ने कहा की मैं अपने लंगड़े साथी से बहुत परेशान हूं उसे भी दृष्टिहीन कर दो यह सुनकर परमात्मा स्वयं आश्चर्यचकित हो गए। इसके पश्चात में लंगड़े व्यक्ति के पास पहुंचे लंगड़े व्यक्ति ने परमात्मा के समक्ष गुहार लगाई प्रभु मेरी यही कामना है कि मेरे दृष्टिहीन साथी को भी लंगड़ा कर दो ।घोर आश्चर्यचकित परमात्मा ने तथास्तु कहा और अदृश्य हीन होगये इसके बाद दृष्टिहीन व्यक्ति झगड़ा भी हो गया और लंगड़ा व्यक्ति दृष्टिहीन हो गया दोनों पहले ही दुखी थे और एक दूसरे के लिए दुख मांगा तो और दुखी हो गए।

इस छोटी सी कहानी से यह आशय निकाल आता है कि हमें भगवान से कभी भी किसी दूसरे का बुरा नहीं मांगना चाहिए ऐसा करने से आप खुद ही दुख के भागी बन जाएंगे।

 

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